
इंदौर। शहरवासियों को चौथे चरण की नर्मदा जलापूर्ति के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा। ‘अमृत योजना’ के तहत प्रस्तावित इस महत्वपूर्ण परियोजना में सबसे बड़ी बाधा जलूद के आगे पाइप लाइन बिछाने के काम को लेकर सामने आ रही है। नगर निगम द्वारा बार-बार प्रयास करने के बावजूद इस कार्य के लिए कोई भी कंपनी आगे नहीं आ रही है, जिससे पूरी योजना अधर में लटकी हुई है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार चौथे चरण में शहर की बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पानी की व्यवस्था की जानी है। इसके लिए जलूद से आगे नई पाइप लाइन बिछाना जरूरी है, लेकिन अब तक इस काम के लिए चार बार टेंडर जारी किए जा चुके हैं और हर बार निराशा ही हाथ लगी है। किसी भी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई, जिससे निगम की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस परियोजना में लागत अधिक होने, तकनीकी जटिलताओं और लंबे समय तक चलने वाले काम के कारण कंपनियां पीछे हट रही हैं। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण, वन क्षेत्र और अनुमति संबंधी समस्याएं भी ठेकेदारों के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं। यही कारण है कि टेंडर प्रक्रिया बार-बार असफल हो रही है। चौथे चरण की जलापूर्ति योजना पूरी होने के बाद शहर के कई नए क्षेत्रों को नियमित और पर्याप्त पानी मिलना था।
खासतौर पर तेजी से विकसित हो रहे बाहरी इलाकों में पानी की समस्या को दूर करने के लिए यह योजना बेहद जरूरी मानी जा रही है। फिलहाल इन क्षेत्रों में टैंकरों और सीमित जलापूर्ति के सहारे काम चलाया जा रहा है।
नगर निगम अब टेंडर की शर्तों में बदलाव करने और परियोजना को आकर्षक बनाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है, ताकि कंपनियां इस काम में रुचि लें। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही नए सिरे से टेंडर जारी किए जा सकते हैं या फिर राज्य शासन से मार्गदर्शन मांगा जाएगा।
जब तक पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू नहीं होता, तब तक चौथे चरण के पानी की उम्मीद करना मुश्किल है। ऐसे में शहर के लोगों को फिलहाल इंतजार करने के लिए तैयार रहना होगा और निगम को इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए ठोस समाधान निकालना जरूरी हो गया है।