
इंदौर। एशियन वाटरबर्ड सेंसस (AWC) 2026 को लेकर इंदौर वन मंडल ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह अंतरराष्ट्रीय महत्व का जलपक्षी सर्वेक्षण 3 और 4 जनवरी 2026 को जिले की प्रमुख आर्द्रभूमियों में किया जाएगा। वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष गणना को और अधिक सटीक बनाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों, बेहतर मैदानी समन्वय और नागरिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया है।
तैयारियों के तहत 2 जनवरी को इंदौर वन मंडल कार्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ पक्षी प्रेमियों और स्वयंसेवकों को पक्षियों की पहचान, सही गणना तकनीक, आर्द्रभूमि मूल्यांकन तथा डिजिटल माध्यम से डेटा दर्ज करने का प्रशिक्षण दिया गया। सर्वेक्षण के दौरान सभी जानकारियां eBird ऐप के माध्यम से दर्ज की जाएंगी, जिससे आंकड़े स्थान, समय और तारीख के साथ सुरक्षित और प्रमाणिक रहेंगे।


इंदौर जिले में 20 से अधिक झीलों, तालाबों, जलाशयों और नदी तटों को सर्वे के लिए चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों की अच्छी उपस्थिति पाई जाती है। इस अभियान में 50 से अधिक प्रशिक्षित पक्षी प्रेमी वन विभाग के साथ मिलकर कार्य करेंगे, ताकि आंकड़े सटीक, दोहराव रहित और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलपक्षी आर्द्रभूमियों की सेहत के सबसे अहम संकेतक होते हैं। हाल के वर्षों में कुछ वेटलैंड्स पर प्रदूषण और मानवीय दबाव बढ़ा है, ऐसे में नियमित और विश्वसनीय निगरानी आवश्यक हो गई है। समयबद्ध योजना और जनभागीदारी के चलते इंदौर इस वर्ष मध्यप्रदेश के बेहतर तैयार जिलों में शामिल है। यह पहल न केवल स्थानीय संरक्षण को मजबूती देगी, बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय जिम्मेदारियों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।