
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल प्रदाय से हुई घटना को लेकर जबलपुर के दौरे से लौटने के बाद रात में मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने सभी 16 नगर निगमों के महापौर, अध्यक्ष तथा आयुक्त और जिला कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और अन्य संबंधित मुख्यालय स्तर के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की और समीक्षा कर जरूरी निर्देश जारी किए।
बैठक में इंदौर कमिश्नर ने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में 28 दिसम्बर को उल्टी, दस्त के प्रकरण सामने आए थे। इसका संभावित कारण पेयजल प्रदूषण माना गया। सूचना मिलते ही नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने त्वरित कार्यवाही की। कुल 13 हजार 444 घरों का सर्वेक्षण किया गया। कुल 310 मरीज भर्ती हुए थे, जिनमें से 235 स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। 24 घंटे डॉक्टरों को ड्यूटी तय की गई। रेफेरल के लिए 10 एम्बुलेंस तैनात की गई। अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार के लिए बेड्स चिन्हांकित किए गए। विशेषज्ञ टीम को मौके पर भेजा गया। शिकायत के निवारण के 24 घंटे कॉल सेंटर सक्रिय किया। घरों से 1600 से अधिक जल आपूर्ति के नमूने लिए गए। सहायता डेस्क भी स्थापित की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि वे नगर निगम प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। जनता का स्वास्थ्य सरकार के लिए सर्वोपरि है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने इंदौर के कमिश्नर नगर निगम दिलीप यादव को हटाकर मंत्रालय में पदस्थ करने के निर्देश दिए। लापरवाही के लिए अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नगर पालिक निगम के महापौरों के साथ कमिश्नर, कलेक्टर और कमिश्नर नगर निगम के साथ बैठक कर नागरिकों को साफ़ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों का अमला जनता की सेहत के प्रति सजग और सतर्क रहे।
इंदौर में हुई घटना की किसी अन्य जगह पुनरावृत्ति नहीं होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के तालमेल में कमी नहीं होना चाहिए। पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के संबंध में प्रशासनिक अधिकारी फोन या अन्य माध्यम से शिकायत की सूचना मिलने पर तत्काल कदम उठाएं।
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नागरिकों को साफ़ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दिशा निर्देश जारी करने संबंधित जानकारी भी बैठक में दी गई। मुख्यमंत्री ने दिशा-निर्देश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
साफ़ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जारी निर्देश के प्रमुख बिंदु
– सघन आबादी अथवा 20 वर्ष से अधिक पुरानी पाईपलाईन का चिन्हांकन।
– पुराने एवं बार-बार लीकेज होने वाली पाईपलाईन, नालियों/सीवर पाईपलाईन के समीप अथवा नीचे से गुजरने वाली पाईपलाईनों का चिन्हांकन।
– चिन्हांकन में पाये गये रिसाव का 48 घंटे के भीतर मरम्मत सुनिश्चित।
– जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) तथा उच्च स्तरीय टंकियों की साफ-सफाई का 7 दिन के अंदर निरीक्षण।
– सभी जल शोधन संयंत्रों, प्रमुख जल स्त्रोतों तथा उच्च स्तरीय टंकियों पर तत्काल जल नमूना परीक्षण।
– प्रदूषण पाए जाने पर तत्काल जल आपूर्ति रोकी जाये एवं वैकल्पिक सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
– क्लोरीन सिस्टम की 24×7 निगरानी की जाए।
– सभी नगरीय निकायों में पाइप लाइन लीकेज की पहचान के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जाए।
– जल आपूर्ति से संबंधित प्राप्त शिकायतों को आपात सेवाओं में रखा जाए।
– लीकेज/दूषित जल शिकायतों का 24 से 48 घंटों के भीतर अनिवार्य रूप से निराकरण किया जाए।
– सीएम हेल्पलाईन में गंदा/दूषित पेयजल तथा सीवेज से संबंधित प्राप्त शिकायतों के निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
पानी में मिला घातक बैक्टीरिया
भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा लाइन से जो वाटर सप्लाई हो रहा था उसमें खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए। इस पानी के सैंपल में ऐसे तत्व भी पाए गए, जो उल्टी, दस्त और हैजा जैसी बीमारी के लिए जिम्मेदार हैं। अभी तक 80 सैंपल की जांच कराई गई, जिसमें से कुछ की रिपोर्ट आई है।
200 से अधिक मरीज अस्पताल में अभी भर्ती
स्थिति रिपोर्ट में बताया गया कि भागीरथपुरा इलाके में 29 दिसंबर से डायरिया के मामले सामने आने शुरू हुए और जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल इनका संज्ञान लिया। शुक्रवार (2 जनवरी 2026) तक कुल 294 मरीज स्थानीय अस्पतालों में भर्ती हुए जिनमें से 93 लोगों को छुट्टी दे दी गई। यानी 201 मरीज अब भी भर्ती हैं जिनमें से 32 आईसीयू में हैं।
