
विक्रम सेन
नई दिल्ली। भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसने एक परमाणु शक्ति संपन्न देश पर तीसरी बार अंदर तक जाकर कार्रवाई की और अपने लक्ष्य में विजय भी प्राप्त की है।
आज युद्ध के पांचवें दिन सीजफायर के बाद भारत आतंकवाद के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता से विश्व मंच पर आदर पा रहा है। दुनिया के तमाम देशों ने भारत का न सिर्फ साथ दिया, बल्कि पाकिस्तान को लताड़ भी लगाई। पाकिस्तान की सेना और उसके राजनीतिक प्रतिष्ठान की बदनीयत दुनिया के सामने आ चुकी है। आर्थिक प्रतिबंध, आयात -निर्यात प्रतिबंध, सैन्य कार्रवाई, सिंधु जल समझौता तोड़कर, पाकिस्तानी नागरिकों को भारत से निकालकर ,पांच एयरबेस नष्ट कर भारत की सरकार ने अपने इरादे जाहिर कर दिए। पाकिस्तान के मंत्रियों, सांसदों की परमाणु धमकियों के बाद भी भारत ने संयम रखकर अपने लक्ष्य हासिल किए। इसके साथ ही इस क्षेत्र को युद्ध में झोंकने से भी बचाया। अंतिम समय तक निरंतर संवाद बनाए रखते हुए भारत की सरकार ने अपार सूझबूझ का परिचय दिया।
पाकिस्तान न सिर्फ चार दिनों में घुटनों पर आ गया बल्कि उसने बातचीत के तमाम सहयोगी चैनल से समझौते के प्रयास किए। ऑपरेशन सिंदूर से आतंकवाद के विरुद्ध भारतीय प्रतिबद्धता का प्रकटीकरण तो हुआ है साथ ही देश के सुदृढ़ सिस्टम और एकजुट देश प्रेम के भाव की उत्कृष्टता को भी इसने प्रकट किया हैं।
1947 से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक भारत ने कई बार पाकिस्तान को धूल चटाई है।
1947-48: पहला भारत-पाकिस्तान युद्ध (कश्मीर युद्ध)
कश्मीर में अक्टूबर 1947 में तब शुरू हुआ, जब पाकिस्तान समर्थित कबायली लड़ाके जम्मू-कश्मीर में घुस आए थे, तब महाराजा हरि सिंह द्वारा भारत में विलय के बाद भारतीय सेना ने मोर्चा संभाला। जनवरी 1949 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ और कश्मीर दो हिस्सों में बंट गया। भारत और पाकिस्तान के बीच लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) बनी थी।
1965: दूसरा INDIA-PAK जंग
5 अगस्त 1965 को पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ के तहत अपने सैनिकों को स्थानीय विद्रोही बनाकर जम्मू-कश्मीर में भेजा था । भारत ने जवाबी सैन्य कार्रवाई की और युद्ध अंतरराष्ट्रीय सीमा तक फैल गया। 23 सितंबर 1965 को सोवियत संघ और अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ था।
1971: बांग्लादेश मुक्ति युद्ध
पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे नरसंहार और दमन के चलते भारत ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन किया। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया था।
1999: करगिल युद्ध
मई-जुलाई 1999 के बीच पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों ने करगिल की ऊंचाईयों पर कब्जा कर लिया था। ये लड़ाई मई से जुलाई तक लड़ी गयी थी, भारत ने ‘ऑपरेशन विजय’ और वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के जरिए इलाके को वापस हासिल किया। यह युद्ध 26 जुलाई को भारत की जीत के साथ समाप्त हुआ, जो अब ‘करगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
2016: उरी हमला और सर्जिकल स्ट्राइक
18 सितंबर को उरी स्थित भारतीय सेना के कैंप पर आतंकियों ने हमला किया, जिसमें 19 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद 28-29 सितंबर को भारतीय सेना ने PoK में आतंकियों के लॉन्च पैड पर सर्जिकल स्ट्राइक की और कई आतंकियों को मार गिराया था।
2019: पुलवामा हमला और बालाकोट एयरस्ट्राइक
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आत्मघाती हमले में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे। इसके जवाब में 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप पर एयरस्ट्राइक की। यह 1971 युद्ध के बाद पहली बार था, जब भारत ने पाकिस्तान की सीमा के अंदर जाकर एयरस्ट्राइक की थी।
जहां तक पड़ोसी पाकिस्तान की बात है वह नालायक हैं और ऐसे लोगों से बना देश भरोसे के लायक नहीं है। पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व और फौज के बीच अपनी ढपली अपना राग का मामला हैं। इन दोनों के अपने अपने इश्यू बनाए गए हैं, जैसे धार्मिक कट्टरवाद के पोषक के रूप में पेश करना और गरीबी तथा प्रताड़ित दिखाना, इन्हीं दो कारणों पर इनकी दुकानदारी चलती हैं।
सच तो यह है कि पहलगाम में जघन्य हत्याकांड कराने पर पाकिस्तान सत्ता तंत्र को यह भरोसा नहीं था कि भारत आपरेशन सिंदूर जैसा कदम उठाकर कार्रवाई करेगा। वह तो अपनी आदत अनुसार संकीर्ण सोच के साथ आतंकी संगठन से भारतीयों पर हमला कर अलग खड़ा हो जानें वाला था।
इस आदत से भारत के सब्र का बांध आखिर टूट ही गया। भारत ने तीसरी बार पाकिस्तान में अंदर घुसकर पाकी आकाओं को सबक सिखाया।
भारत के ऑपरेशन सिंदूर में सिर्फ पहलगाम आतंकी हमले का क्रोध नहीं था, बल्कि संसद हमला हो, या मुंबई हमला या फिर पुलवामा हमला… हर आतंकी हमले का प्रतिशोध था। यकीन मानिए कुछ घंटों की लड़ाई में ही पाकिस्तानी सेना के हाथ पांव फूल गये थे
पाकिस्तानी सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर भले जितना उछल कूद मचा लें, शहबाज शरीफ जीत का दावा कर लें, लेकिन हकीकत ये है कि 3-4 घंटे भी भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान की सेना नहीं ठहर पाई। भारत ने अपने हमले में पूरी क्षमता वाले हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि काफी कम विध्वंसक हथियारों का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान सालों से आतंकी हमले करता आ रहा था, वो भारत को चिढ़ाता था, मजाक उड़ाता था, उसने परमाणु हथियारों की आड़ में ‘ब्लीड इंडिया’ का भ्रम पाल रखा था, जिसे भारत ने ऑपरेशन के साथ ध्वस्त कर दिया है। पाकिस्तान को साफ शब्दों में संदेश चला गया है कि भारत जब चाहे उसके घर में घुसकर उसे ठोक सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर का सबसे बड़ा सबक अगर भारत ने पाकिस्तान को ये सिखाया है कि परमाणु बम होने के बावजूद वो उसके घर में घुसकर हमला कर सकता है, उसे दंडित कर सकता है। साल 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी दोनों देश परमाणु सशस्त्र थे, फिर भी वो संघर्ष काफी सीमित रहा था, जिसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ एक क्षेत्र में युद्ध का होना था। कारगिल का इलाका काफी मुश्किल था जो एलओसी के काफी सीमित क्षेत्र में लड़ा गया था और भारत वो लड़ाई कारगिल से पाकिस्तानी सैनिकों को भगाने के लिए लड़ रहा था। उस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के अंदर में हमला नहीं किया था और ना ऐसा कोई फैसला लिया गया था। इसके अलावा उस वक्त दोनों देशों के पास नये नये परमाणु हथियार थे और दोनों ही देश परमाणु हथियारों को लेकर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम विकसित कर रहे थे।
लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हालात अलग थे। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान परमाणु बम रखने वाले पाकिस्तान के अंदर घुसकर उसके एयरबेस उड़ाए, उसके मिसाइल डिफेंस सिस्टम तहस-नहस किए और ऐसा पूरी क्षमता के साथ था, जिसमें भारत ने पाकिस्तान की सेना को सिर्फ कुछ घंटों की लड़ाई में अपनी ताकत दिखा दी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के हृदय स्थल पंजाब में हमले किए और संदेश दिया कि देश का संयम पर खत्म हो चुका है।
भारत के हवाई और मिसाइल हमलों ने पाकिस्तान के महत्वपूर्ण शहरों के एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया और भारत ने कम से कम पाकिस्तानी एयर फोर्स के 11 ठिकानों पर मौजूद अहम प्रॉपर्टी को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। भारत का सबसे बड़ा हमला रावलपिंडी, जहां पाकिस्तानी सेना का हेडक्वार्टर (जीएचक्यू) है, उस शहर में किया गया। रावलपिंडी एयरबेस, जो जीएचक्यू से सिर्फ 12 किलोमीटर दूर है, भारत ने उसे तहस-नहस कर दिया। इस हमले ने पाकिस्तान को डरा दिया। भारत का ये हमला सिर्फ एक रणनीतिक हमला नहीं था, बल्कि पाकिस्तानी सेना को सीधी चुनौती थी। रावलपिंडी पर हमले ने जीएचक्यू की सांसे रोक दी और उसे संदेश मिल गया कि भारत जब चाहे जीएचक्यू को भी खत्म कर सकता है। ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने दो सबसे महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। पहला ये कि पाकिस्तान का कोई भी सैन्य ठिकाना या आतंकी सेंटर भारत की मिसाइलों की पहुंच से दूर नहीं हैं और दूसरा संदेश ये कि भारत ने परमाणु बम के डर की दीवार को तोड़ दिया है। भारत, पाकिस्तान की परमाणु धमकियों से विचलित हुए बिना उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। कारगिल युद्ध के बाद पाकिस्तान के आतंकियों ने दर्जनों बार भारत में आतंकी हमले किए लेकिन पाकिस्तान की परमाणु गीदड़भभकी ने भारत के बाथ बांधकर रखे थे। पाकिस्तानी सेना की रणनीति साफ थी कि परमाणु बम की आड़ में भारत में आतंकी हमले करना, भारत को उकसाना और अगर भारत कुछ करने का फैसला ले तो परमाणु बम का कार्ड दिखाना। संसद पर हमले के बाद भी भारत ने अपनी सेना को जुटाया था लेकिन फिर भारत पीछे हट गया था। कई लोगों ने इसे भारत का धैर्य माना तो कई लोगों ने परमाणु हथियारों का डर।
लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने तमाम भ्रम को तोड़ दिया। इसने भारत के परमाणु डर की दीवार को तोड़ दिया और पाकिस्तान के ब्लीड इंडिया भ्रम को तोड़ दिया। ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने दिखाया है कि भारत घातक हमले कर सकता है और करेगा। पाकिस्तान के पंजाब में रहने वाले आतंकवादी भी सुरक्षित नहीं हैं। ऑपरेशन सिंदूर किसी राजनीतिक या प्रतीकात्मक जीत की कहानी नहीं है, बल्कि ये कहानी है भारतीय सेना की, जिसने गतिरोधक हथियारों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तक, रीयल टाइम निगरानी से लेकर वायु-रक्षा तक… भारत ने कई तरह की क्षमताएं पेश कीं और पाकिस्तान को कोई मौका नहीं दिया। पाकिस्तान के परमाणु कमांड को तबाह करने वाला था भारत? नूर खान एयरबेस पर हमले से कांप गये थे शहबाज, तुरंत लगाया अमेरिका फोन। अमेरिका और सऊदी अरब को तत्काल बीच में आकर भारत से वार्ता करनी पड़ी, पर इसके लिए भारत से अनुनय का काम पाकिस्तान के सुपुर्द किया गया।
यही वजह थी कि पाकिस्तान ने युद्धविराम के लिए फोन किया, जो उसके घुटने टेकने की बात को दिखाता है। पंजाब में हमला पाकिस्तानी सेना के दिल पर खंजर उतारने जैसा है, जो उसे चैन से सोने नहीं देगा। पाकिस्तानी सेना का परमाणु कवच अब मुरीदके, बहावलपुर समेत तमाम एयरबेस में खंडहर बन चुकी इमारतों में ध्वस्त हो चुका है। और सबसे बड़ी बात कि भारत ने खुद को साबित किया है। पाकिस्तान अब जान गया है कि उसका ‘न्यूक्लियर शील्ड’ नाम का भ्रम अब सिर्फ इतिहास की किताबों में मिलेगा।