
मुंबई। हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित, सफल और प्रतिष्ठित फिल्म ‘शोले’ की रिलीज को 50 साल से ज्यादा हो गए। अब इसे कई बदलाव के साथ फिर परदे पर उतारा गया है। फ़िल्म में जो बदलाव किए गए, वे ओरिजनल सीन है जो फ़िल्म के कथानक के साथ फिल्माए गए थे। लेकिन, आपातकाल की सख़्ती में सेंसर बोर्ड ने उनके प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई, इस कारण फ़िल्म के अंत समेत हिंसा के कई सीन को फिर से शूट कर जोड़ा गया था। अब उन्हीं ओरिजनल सीन को जोड़कर फ़िल्म को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया।
रमेश सिप्पी की यह फिल्म पहली बार 1975 में थिएटर में रिलीज हुई थी। जब फिल्म थिएटर में रिलीज हुई थी, तब देश में आपातकाल लगा था। सरकार और सेंसरशिप के दबाव में मेकर्स को ‘शोले’ का क्लाइमैक्स बदलकर उसे रीशूट करना पड़ा था। अब, 50 साल बाद जब ‘शोले’ दोबारा थिएटर में रिलीज हुई है, तो इसे अनकट रिलीज किया गया। मतलब अब दर्शकों को ओरिजिनल ‘शोले’ देखने को मिलेगी, वे डायलॉग भी सुनने को मिलेंगे जो ओरिजिनल फिल्म से हटा दिए गए थे।

अब ये फ़िल्म आज 12 दिसंबर को फिर बड़े परदे पर रिलीज की गई। यह फ़िल्म 1500 स्क्रीन पर रिलीज की गई। इस खास अवसर पर पर फिल्म के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का कहना है कि अब जो फ़िल्म रिलीज हुई, वह असल में वही फिल्म है, जो मैंने बनाई थी। फ़िल्म में बहुत बड़ा बदलाव नहीं है, जितना लोग समझ रहे हैं। तब जिस तरह से हमने इसे शुरुआत से अंत तक चाहा था, हमें सेंसर की वजह से थोड़ा-सा समझौता करना पड़ा था। अब हम यह देखना चाहते हैं कि ओरिजिनल एंडिंग दर्शकों को कैसी लगती है। बड़ी खुशी की बात है कि 50 साल बाद यह फिल्म फिर एक बार रिलीज हुई। अब यह देखना है कि दर्शकों में इसे लेकर कितनी उत्सुकता है।
फ़िल्म के दो लेखक थे सलीम खान और जावेद अख्तर। शोले के रिलीज पर उन्होंने बताया कि ‘शोले’ टाइटल का चुनाव एकमत से नहीं हुआ था। बहुत से लोगों को लगा था कि यह किसी एक्शन फिल्म का नहीं, बल्कि रोमांटिक फिल्म का नाम है। एक बहुत पुरानी फिल्म भी ‘शोले’ नाम से आई थी, जो नहीं चली थी। उसकी स्पेलिंग SHOLE थी। तब हमने अपनी फिल्म की स्पेलिंग SHOLAY रखी, ताकि यह अलग और प्रभावशाली लगे।
उन्होंने यह भी बताया कि जब हमने ‘शोले’ लिखना शुरू किया, तो हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह इतनी बड़ी स्टार कास्ट की फिल्म बनेगी। हमारी कहानी तो बस एक ठाकुर और दो लड़कों पर केंद्रित थी। लेकिन, जैसे-जैसे हम कहानी को विस्तार देने लगे, बाकी किरदार भी अपने आप सामने आने लगे। जय और वीरू की जिंदगी में बसंती और राधा, साथ ही जेलर, सूरमा भोपाली और मौसी जैसे किरदार भी कहानी का हिस्सा बने। इस तरह धीरे-धीरे स्क्रिप्ट बड़ी होती गई, जिसे हमारे प्रोड्यूसर जीपी सिप्पी और रमेश सिप्पी ने इतने बड़े स्केल पर बनाया कि उसकी उस जमाने में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था।
