
इंदौर। ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन (AITE) 2026 की तैयारी को गति देते हुए इंदौर वन मंडल में आयोजित दो दिवसीय डेमोंस्ट्रेशन वर्कशॉप का दूसरा दिन शुक्रवार को सफलतापूर्वक पूरा किया। पहले दिन मांसाहारी वन्यजीव संकेत सर्वे के बाद 12 दिसंबर को शाकाहारी जीवों और उनके आवास का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन किया गया। यह सर्वे इंदौर, चोरल, महू और मानपुर के चार प्रादेशिक परिक्षेत्रों के कुल 102 बीट तथा राला मंडल अभयारण्य में एक साथ हुआ।
AITE प्रोटोकॉल के अनुसार चीतल, सांभर, नीलगाय, ब्लैकबक, खरहा, लंगूर और मोर जैसे शाकाहारी जीव किसी क्षेत्र में मांसाहारी प्रजातियों की उपस्थिति के प्रमुख संकेतक माने जाते हैं। सर्वे टीमों ने ताज़े खुरों के निशान, मल-पेलिट विश्लेषण, झाड़ियों पर ब्राउजिंग प्रेशर, चराई क्षेत्र, वनस्पति की स्थिति जैसे कई वैज्ञानिक मानकों का मूल्यांकन निर्धारित ट्रांसेक्ट मार्गों पर प्रातःकालीन समय में किया।
टीमों ने वनस्पति घनत्व, प्रजातिगत विविधता, चराई दबाव,अवैध लकड़ी कटाई के संकेत, मवेशियों की आवाजाही और मानवजनित गतिविधियों का भी विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया। इन तत्वों का वन्यजीव वितरण और जंगल के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
इंदौर वनमंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा का कहना है कि इस अभ्यास से फील्ड स्टाफ की तकनीकी क्षमता जैसे डंग काउंट, लाइन ट्रांसेक्ट तकनीक और आवास वर्गीकरण—और अधिक मजबूत हुई है। ऐसे वैज्ञानिक प्रशिक्षण न केवल टीमों में कार्य की एकरूपता लाते हैं, बल्कि AITE 2026 के लिए उच्च गुणवत्ता वाले, विश्वसनीय डेटा संग्रह में भी अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
