
भोपाल। दूषित पेयजल मामले में इंदौर में दो दर्जन से ज्यादा मौत होने के बाद देशभर में मध्य प्रदेश की छवि धूमिल हुई। जिस भागीरथपुरा इलाके में ये घटना हुई वहां के विधायक और प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की भी जमकर किरकिरी हुई। इस मामले के सामने आने के बाद वे लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं।
ताजा प्रसंग यह है कि उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली। यहां तक कि गणतंत्र दिवस पर ध्वज फहराने के लिए जारी मंत्रियों की सूची में भी उनका नाम नहीं है। इंदौर में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ध्वज फहराएंगे। जबकि, धार में भी ध्वज वंदन में उनका नाम नहीं है, जबकि वे वहां के प्रभारी मंत्री हैं। उन्होंने कैबिनेट की ब्रीफिंग करने से भी इंकार कर दिया था। इस घटनाक्रम के बीच उनकी ओर से बयान जारी किया गया कि एक पारिवारिक मित्र के यहां गमी (निधन) के चलते वह 10 दिन किसी कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं होंगे।
यह कयास भी लगाए जा रहे
उनके इस तरह से सार्वजनिक कार्यक्रमों से पहली बार दूर होने के यह भी मायने लगाए जा रहे हैं कि दूषित पेयजल का मामला और इस बीच एक विवादित बयान पर जमकर हुई निंदा से वह आहत हैं। कुछ लोग चर्चा कर रहे हैं कि केंद्रीय नेतृत्व उनसे नाराज हो सकता है। यह भी चर्चा चल पड़ी कि संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में उनका वजन कम किया जा सकता है।
इंदौर के कार्यक्रमों से भी दूरी
सभाओं या कार्यक्रमों में भी वे इंदौर में भी सम्मिलित नहीं हो रहे। 19 जनवरी को दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में वे प्रदेश के अन्य नेताओं के साथ सम्मिलित हुए थे। कैबिनेट की बैठकों में भी कैलाश विजयवर्गीय मुखर रहते हैं। कई बार प्रस्तावों का उन्होंने तर्कों के साथ विरोध भी किया, पर इंदौर के घटनाक्रम के बाद वह अपेक्षाकृत शांत हैं।
अमर्यादित बोल पर आलोचना
भागीरथपुरा की घटना में मीडिया के सवाल पर उनके बडेबोल के चलते उन्हें जमकर आलोचना झेलनी पड़ी थी। प्रदेश ही नहीं देशभर में पार्टी की किरकिरी हुई। विपक्ष ने भी इसे खूब भुनाया और मीडिया में भी उनकी छीछालेदर हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी व अन्य नेताओं ने बयान जारी कर कैलाश विजयवर्गीय को ही नहीं, पूरी पार्टी को भी घेरा। प्रदेश में कांग्रेस ने उनके त्यागपत्र की मांग तक की। प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पहले ही कुछ नेताओं का नाम लेकर तो कुछ का नाम लिए बिना बड़बोलेपन से बचने के लिए सख्त लहजे में चेतावनी दे चुका है।
ऐसे बयानों पर पहले भी विवाद
कैलाश विजयवर्गीय ने पिछले एक वर्ष में कई ऐसे बयान दिए जो विवादों में रहे। बाद में उन्हें इसकी सफाई भी देनी पड़ी। इंदौर में ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेटरों के साथ छेड़छाड़ की घटना पर उन्होंने कहा था, खिलाड़ियों को होटल से निकलने के पहले अधिकारियों को बताना चाहिए था। इस बयान की भी खूब आलोचना हुई थी। इसके अलावा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर भी उनके बयान पर बवाल हो चुका है।