
नई दिल्ली। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बीते कुछ दिनों से लगातार लुढ़क रहा है। आज 3 दिसंबर को रुपया पहली बार मनोवैज्ञानिक रूप से अहम ₹90 के स्तर के ऊपर चला गया और कारोबार के दौरान 90.13 तक गिर गया। यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 89.9475 पर पहुंचा था, जिससे बाजार में करेंसी की स्थिरता को लेकर चिंता और बढ़ गई।
भारतीय रुपया मंगलवार को भारी गिरावट के साथ अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 42 पैसे टूटकर 89.95 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में यह कुछ समय के लिए ₹90 के रिकॉर्ड स्तर तक भी फिसल गया।
आज रुपया 89.87/$ के मुकाबले 89.97/$ पर खुला। यानी ओपनिंग में ही लगभग 10 पैसे की कमजोरी दिखाई दी। लेकिन, गिरावट यहीं नहीं रुकी-ट्रेडिंग शुरू होते ही डॉलर की खरीद बढ़ी और रुपया फिसलकर सीधे ₹90.14/$ के ऑल-टाइम लो तक पहुंच गया। यह पहली बार है जब भारतीय करेंसी ने 90 का मनोवैज्ञानिक स्तर तोड़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार ट्रेडर्स की बिकवाली, आयातकों की डॉलर डिमांड, विदेशी पूंजी की निकासी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता जैसे सभी कारणों ने रुपए पर भारी दबाव बनाया।
91 तक जा सकता है रुपया
दिन की शुरुआत में रुपया 89.70 पर खुला, लेकिन कारोबार के दौरान 47 पैसे टूटकर 90.00 तक गिर गया। कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी विशेषज्ञ अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, ₹90 एक बड़ा मनोवैज्ञानिक स्तर है। अगर रुपया इसके ऊपर (कमज़ोर) जाता है, तो यह तेज गति से 91.00 या उससे भी ज्यादा के स्तर की ओर बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति में आरबीआई को आक्रामक होकर दखल देना चाहिए, ताकि सट्टेबाज़ों को एकतरफा दांव लगाने से रोका जा सके और डॉलर-रुपया बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव न बढ़े।
बिकवाली और कमजोर मार्केट ने बढ़ाया दबाव
– डॉलर इंडेक्स 0.06% चढ़कर 99.41 पर रहा
– सेंसेक्स 503 अंक टूटकर 85,138.27 पर बंद
– निफ्टी 143 अंक गिरकर 26,032.20 पर आया
– एफआईआई ने सोमवार को ₹1,171.31 करोड़ की बिकवाली की
– ब्रेंट क्रूड 0.25% गिरकर $63.03 प्रति बैरल पर रहा
विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और विश्व बाजार में डॉलर की मजबूती ने रुपए की गिरावट को और गहरा किया।
