
इंदौर। प्रॉपर्टी व्यवसाय से जुड़े युवक को प्लॉट की बड़ी डील के बाद मिली रकम से नई टोयोटा फॉर्च्यूनर खरीदनी थी, लेकिन इसी दौरान ठगों ने उसे अमेरिकी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर रकम दोगुनी करने का लालच दिया और धोखा दिया।
आरोपियों ने पहले उससे नगद राशि ली और उसी पैसे से पीड़ित के ट्रस्ट वॉलेट में यूएसडीटी खरीदवाए। इनमें से आरोपी मुर्तजा नगद रुपए लेता था और उसका साथी ताहिर महूवाला से यूएसडीटी खरीदवाता था। दोनों आरोपी कमीशन काटकर यूएसडीटी ट्रांसफर कराते थे। इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को कॉइन आथेंटिकेटर की लिंक भेजकर यूएसडीटी चेक करने का बहाना बनाया। जैसे ही पीड़ित ने लिंक खोली, उसके ट्रस्ट वॉलेट से पूरे 65,000 यूएसडीटी दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर कर दिए गए।
यूएसडीटी खरीदने के बाद पीड़ित को धोखा मिला। इसके बाद फरियादी हितेश प्रधान ने साइबर सेल में शिकायत की थी। शिकायत पर अज्ञात आरोपियों पर धारा 318(4), 319(2) बीएनएस और 66(डी) आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले में जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी जब्त किए गए।
लिंक के जरिए खाली किया
तकनीकी विश्लेषण में स्पष्ट हुआ कि आरोपी मुर्तजा शैफी निवासी खातीवाला टैंक, अपने साथी ताहिर महूवाला के साथ मिलकर पीड़ित से 55 लाख रुपए लेकर 65,000 यूएसडीटी ट्रस्ट वॉलेट में ट्रांसफर करवाता था। ट्रस्ट वॉलेट मोबाइल ऐप है जिसके माध्यम से क्रिप्टो करेंसी खरीदी, बेची और सुरक्षित रखी जा सकती है। इसी ऐप में मौजूद यूएसडीटी को ऑथेंटिकेशन के नाम पर भेजी गई लिंक के जरिए खाली कर लिया गया।
आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
शिकायत के बाद सेल ने पुलिस टीम का गठन किया। टीम ने दस्तावेजों के आधार पर दोनों आरोपियों मुर्तजा पिता सैफुद्दीन शैफी (48) निवासी खातीवाला टैंक और ताहिर पिता अमीरुद्दीन महूवाला (22) निवासी केट रोड राऊ को गिरफतार कर लिया। पूछताछ में आरोपी मुर्तजा ने स्वीकार किया कि उसने सह आरोपी ताहिर के कहने पर पीड़ित से नगद 55 लाख रुपए लेकर ताहिर से 65,000 यूएसडीटी ट्रांसफर करवाए थे। टीम ने आरोपियों से व्हाट्सएप चैट, मोबाइल और सिम कार्ड भी बरामद किए हैं। आरोपियों से अन्य वारदातों को लेकर पूछताछ की जा रही है। कुछ माह पहले भी साइबर सेल और क्राइम ब्रांच के बाद क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर आनलाइन ठगी के मामले सामने आ चुके है। इस तरह की करेंसी में निवेश नहीं करने को लेकर पुलिस जागरूकता अभियान चला चुकी है, फिर भी लोग बदमाशों के झांसे में आकर अपनी कमाई गंवा देते हैं।