
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी सेवकों के लिए आचरण नियम मूल रूप से 1965 में बनाए गए थे, जिनमें आखिरी बार बड़ा बदलाव साल 2000 में हुआ था। अब करीब 26 साल बाद वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग की एक विशेष समिति इन नियमों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुकूल बनाने के लिए मंथन कर रही है। इस सुधार का मुख्य उद्देश्य नियमों को अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी बनाना है।
उपहार की सीमा में अब ‘मूल वेतन’ बन सकता है पैमाना
मौजूदा नियम अब काफी पुराने लगने लगे हैं। वर्तमान में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के लिए उपहार की अधिकतम सीमा महज 1,500 रुपए है, जिसे आज के दौर में अव्यावहारिक माना जा रहा है।
– नया प्रस्ताव : वित्त विभाग ने सुझाव दिया है कि कर्मचारियों को एक बार में अपने एक माह के मूल वेतन (Basic Pay) के बराबर नकद उपहार लेने की छूट दी जाए।
– अंतिम मुहर : इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में लिया जाएगा।
सामाजिक आतिथ्य और पुराने प्रतिबंध
प्रस्तावित बदलावों के बावजूद कुछ बुनियादी नियम यथावत रहेंगे। जैसे अनौपचारिक भोजन, किसी से लिफ्ट लेना या सामान्य सामाजिक आतिथ्य को ‘उपहार’ की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा। विवाह, जन्मदिन या धार्मिक आयोजनों पर परिजनों से मिलने वाले उपहारों की सूचना देने का प्रावधान बना रहेगा, लेकिन उनकी सीमा में वृद्धि निश्चित है।
वर्तमान में यह हैं सीमाएं?
अभी लागू नियमों के अनुसार, यदि उपहार की कीमत निम्नांकित सीमा से अधिक होती है, तो एक महीने के भीतर सरकार को सूचित करना अनिवार्य है। प्रथम व द्वितीय श्रेणी के अधिकारी ₹1,500 से अधिक। तृतीय श्रेणी के कर्मचारी ₹700 से अधिक। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ₹250 से अधिक।
महंगी संपत्तियों पर रहेगी कड़ी नजर
भले ही छोटे उपहारों के नियमों में ढील दी जा रही हो, लेकिन जमीन, मकान और वाहनों जैसे कीमती उपहारों पर सख्ती कम नहीं होगी। कृषि भूमि, भूखंड या फ्लैट जैसे उपहारों की जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग को देना अनिवार्य रहेगा। ऐसी संपत्तियों का उल्लेख कर्मचारी को अपने वार्षिक अचल संपत्ति विवरण में भी करना होगा।