
इंदौर। शहर में अब किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जाएगी। अभी तक जो भी पेड़ काटे गए, वो ट्री ऑफिसर की अनुमति के आधार पर ही कटे। लेकिन, कलेक्टर ने जिसे ट्री ऑफिसर नियुक्त किया वह अवैध है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्री ऑफिसर नियुक्त करने का अधिकार केवल राज्य सरकार को है और इस अधिकार का उपयोग कलेक्टर नहीं कर सकते। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को शहरी क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए यह निर्देश दिए।
डॉ अमन शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया गया। याचिका में मध्यप्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 की धारा 4 और 6 का हवाला देते हुए कहा गया कि कानून के तहत ट्री ऑफिसर नियुक्त करने का अधिकार केवल राज्य सरकार को है। इसके बावजूद इंदौर कलेक्टर द्वारा वन अधिकारी को ट्री ऑफिसर नियुक्त कर दिया गया, जो पूरी तरह से अवैध और उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। यह आदेश पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम माना जा रहा है।
ट्री ऑफिसर की नियुक्ति कानूनन अवैध
दायर याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि नगर निगम द्वारा मल्हार आश्रम और एमओजी लाइंस जैसी विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़ी संख्या में पुराने और हरे-भरे पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई। गंभीर बात यह है कि यह अनुमति ऐसे ट्री ऑफिसर द्वारा दी गई, जिसकी नियुक्ति ही कानूनन वैध नहीं है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि इस तरह शहर में बिना वैध अनुमति के अंधाधुंध पेड़ों की कटाई की जा रही है।
राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी नहीं
हाई कोर्ट ने याद दिलाया कि 18 दिसंबर, 2024 को भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए थे कि वह तुरंत किसी गजेटेड रैंक के वन अधिकारी को ट्री ऑफिसर नियुक्त करे। इसके बावजूद राज्य सरकार ने अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कलेक्टर को ट्री ऑफिसर नियुक्त करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार के विधिवत नियुक्त ट्री ऑफिसर के बिना शहर में पेड़ों की कटाई नहीं होगी। मामले को इसी मुद्दे से जुड़े एक अन्य प्रकरण के साथ 16 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
तीन-चार साल से हरियाली की लगातार कटाई
देखा गया कि बीते तीन-चार सालों से शहरी हरियाली लगातार घट रही है। भंवरकुआं, लवकुश, फूटी कोठी और खजराना ब्रिज के लिए पांच हजार से अधिक पेड़ों को काटा गया। आईटी पार्क चौराहे पर बने रहे ब्रिज के भी 1200 से अधिक पेड़ काटे गए। मूसाखेड़ी ब्रिज के लिए भी ग्रीन बेल्ट का सफाया किया गया। रीगल के पास रानी सराय में 200 से अधिक पेड़ों पर बैठने हजारों तोतों के आशियाने को हाई कोर्ट ने ही बचाया। हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए एक भी पेड़ काटने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने बड़वाह में भी मोद्री जैसे घने वन क्षेत्र में माइनिंग के लिए जंगल साफ करने के प्रोजेक्ट पर भी यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
