
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली। ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन होने वाली जुमे की नमाज पर रोक लगाने और उस दिन केवल सरस्वती पूजा की अनुमति देने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर 22 जनवरी (गुरुवार) को सुनवाई की सहमति जताई है।
दायर याचिका की मुख्य मांगें
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दायर याचिका में कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं।
(1) 23 जनवरी को भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज पर पूर्ण रोक लगाई जाए। क्योंकि, उसी दिन बसंत पंचमी का पर्व है और मां वाग्देवी (सरस्वती) की पूजा का विशेष महत्व है।
(2) केवल हिंदू पक्ष को अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति दी जाए।
(3) पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए, जिसमें 2003 के एएसआई के आदेश पर सवाल उठाए गए हैं।
(4) एएसआई और प्रदेश सरकार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए जाएं, ताकि साम्प्रदायिक तनाव न फैले।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि भोजशाला 11वीं सदी में परमार राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जो बाद में विवादास्पद रूप से मस्जिद में परिवर्तित हो गया। हिंदू पक्ष का कहना है कि 2003 के एएसआई समझौते के तहत मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज होती है, लेकिन बसंत पंचमी जैसे विशेष अवसर पर यह व्यवस्था टकराव पैदा कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए 22 जनवरी को सुनवाई तय की है। अभी तक कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया, लेकिन हिंदू पक्ष की जल्द सुनवाई की गुहार पर सहमति दी गई। इस याचिका में मुस्लिम पक्ष मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी को नोटिस जारी किया गया है। उपयोगकर्ता द्वारा संलग्न दस्तावेज भी इसी मामले से जुड़ा प्रतीत होता है, जिसमें हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस को प्रतिवादी और मौलाना कमालुद्दीन सोसाइटी को याचिकाकर्ता बताया गया है, साथ ही दिशा-निर्देशों के लिए आवेदन शामिल है। विष्णु शंकर जैन द्वारा दाखिल यह दस्तावेज 2 जनवरी 2026 को फाइल किया गया, जो वर्तमान याचिका का हिस्सा हो सकता है।


एएसआई सर्वे आदेश पर स्टे
पिछले वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने इसी विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एएसआई सर्वे आदेश पर स्टे लगाया था (अप्रैल 2024), जिसे हिंदू पक्ष हटाने की कोशिश कर रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि एएसआई रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई बिना सुनवाई के नहीं होगी।
विवाद का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद दशकों पुराना है। हिंदू पक्ष का तर्क है कि यह सरस्वती का मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता है। 2003 में एएसआई ने समझौता किया कि मंगलवार को पूजा, शुक्रवार को नमाज। 2023 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एएसआई सर्वे का आदेश दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया। अब बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026, जो शुक्रवार है) पर टकराव की आशंका ने मामले को तूल दिया है। स्थानीय प्रशासन ने शांति बैठक बुलाई, जिसमें दोनों पक्षों ने सहमति जताई।
सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए
धार के कलेक्टर और एसपी ने हिंदू-मुस्लिम प्रतिनिधियों के साथ सर्किट हाउस में बैठक की, जहां शांति बनाए रखने पर जोर दिया गया। शहर में 8000 पुलिस बल तैनात किया गया है। इस बल ने शहर में परेड भी की ताकि सुरक्षा का माहौल बनाया जाए। इंदौर कमिश्नर ने भी पिछले दिनों दोनों समाज के प्रतिनिधियों से बात कर शांति बनाए रखने की अपील की।