
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार सुशासन और किसानों की समृद्धि के लिए अप्रैल महीने से एक व्यापक राजस्व महाभियान शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशों पर आधारित इस अभियान का मुख्य लक्ष्य लंबित राजस्व मामलों का त्वरित निपटारा और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुँचाना है।
राजस्व मामलों का होगा ‘सुपरफास्ट’ निपटारा
इस अभियान के तहत तहसील और जिला स्तर पर लंबित उन मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी जो लंबे समय से किसानों की परेशानी का कारण बने हुए हैं।
– नामांतरण व बंटवारा : अविवादित नामांतरण और बटांकन के प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण।
– सीमांकन : जमीन की पैमाइश से जुड़े विवादों को खत्म करना।
– खसरा सुधार : खसरे की त्रुटियों को सुधारकर रिकॉर्ड को अपडेट करना।
– निगरानी : मुख्य सचिव और प्रभारी मंत्री नियमित रूप से जिलों की रैंकिंग और प्रगति की समीक्षा करेंगे।
कृषि विविधीकरण और आय वृद्धि पर जोर
सरकार केवल जमीन के विवाद ही नहीं सुलझाएगी, बल्कि किसानों की जेब भरने के लिए उन्हें नए क्षेत्रों से भी जोड़ेगी।
– मत्स्य पालन व पशुपालन : किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ इन क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
– प्राकृतिक एवं उद्यानिकी खेती : जैविक और बागवानी फसलों के लिए पात्र हितग्राहियों का चयन कर उन्हें योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।
गेहूँ उपार्जन, ₹2,585 के समर्थन मूल्य पर खरीदी
इसी महीने से रबी फसल की खरीदी का काम भी युद्ध स्तर पर शुरू हो रहा है।
– न्यूनतम समर्थन मूल्य : इस वर्ष 2,585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ खरीदा जाएगा।
– सुविधाजनक स्लॉट बुकिंग : करीब 3,500 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ किसान अपनी सुविधा के अनुसार समय चुनकर फसल बेच सकेंगे।
– कलेक्टरों की जवाबदेही : केंद्रों पर किसानों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। सरकार का लक्ष्य है कि ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के दौरान कोई भी पात्र किसान सरकारी लाभ से वंचित न रहे और राजस्व विभाग से जुड़ी फाइलें दफ्तरों में धूल न फांकें।