

नई दिल्ली। एआई समिट में गलगोटियास यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर ‘रोबोटिक डॉग’ प्रदर्शित किया गया, जिसे यूनिवर्सिटी ने अपने यहां बनाया बताया था। जबकि, ये चीन में बना रोबोटिक डॉग था। इसे लेकर इतना विवाद हुआ कि यूनिवर्सिटी से स्टॉल खाली करवा लिया गया और उस महिला प्रोफेसर को भी नौकरी से निकाल दिया, जिसने यूनिवर्सिटी में यह डॉग बनाने का दावा किया था।
कांग्रेस ने सरकार की घेरेबंदी की
अब इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बौद्धिक आयोजन को सरकार ने तमाशा’ बना दिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि यह वैश्विक मंच भारतीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का अवसर था। लेकिन इसे ‘जनसंपर्क तमाशा’ बना दिया गया। उन्होंने लिखा कि एआई शिखर सम्मेलन का लाभ भारत की प्रतिभा और डेटा को मिलना चाहिए था, न कि इसे प्रचार का माध्यम बनाया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक बयान को भी साझा किया, जिसमें कहा गया कि इस घटनाक्रम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित हुई है।
आखिर क्या था यह पूरा विवाद
समिट में भाग लेने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि चीन में निर्मित रोबोटिक डॉग को यूनिवर्सिटी ने खुद की खोज बताकर पेश किया। विवाद बढ़ने के बाद आयोजकों ने इस संस्थान को समिट एक्सपो क्षेत्र खाली करने का निर्देश दिया। दरअसल, समिट में प्रदर्शित ‘रोबोटिक डॉग’ को लेकर सवाल उठे कि यह एक चीनी कंपनी द्वारा निर्मित उत्पाद है न कि यूनिवर्सिटी की खोज! इसके बाद सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी की आलोचना शुरू हो गई।
यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में कहा कि रोबोटिक प्लेटफॉर्म का उपयोग छात्रों को एआई एप्लिकेशन और प्रोग्रामिंग सिखाने के लिए किया गया था। संस्थान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह दावा नहीं किया कि रोबो डॉग पूरी तरह से उनका निर्माण है।
निकाली गई प्रोफेसर को नौकरी की तलाश
चीन में निर्मित रोबोट डॉग को गलगोटिया यूनिवर्सिटी की खोज बताने वाली प्रो नेहा सिंह को अब नई नौकरी की तलाश हैं। उन्होंने लिंक्डइन प्रोफाइल पर ‘ओपन टू वर्क’ का स्टेटस अपडेट कर दिया। क्योंकि, यूनिवर्सिटी ने इस पूरे मामले के लिए प्रोफेसर को जिम्मेदार ठहराते हुए माफी मांगी। यूनिवर्सिटी ने कहा कि हमारी एक प्रतिनिधि को सही जानकारी नहीं थी। वे कैमरे पर आने के उत्साह में गलत तथ्य दे गईं। उन्हें प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत भी नहीं किया गया था।
गलत जानकारी बर्दाश्त नहीं
इस विवाद पर आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा कि हम चाहते हैं कि लोग एक्सपो में जो भी प्रदर्शित करें, उसमें उनका वास्तविक काम दिखे। हम नहीं चाहते कि ऐसे आयोजनों का इस्तेमाल किसी और तरीके से किया जाए। गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
यह वीडियो वायरल होने से हुआ विवाद
वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह कह रही हैं कि इस रोबोटिक डॉग का नाम ‘ओरियन’ है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने तैयार किया है। उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी एआई के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी ‘यूनिट्री’ का ‘जिओ2’ मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपए में मिलता है।
