
नई दिल्ली। भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों को बड़ी सफलता मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट पूरा किया है। यह परीक्षण टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज सुविधा में किया गया।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा संचालित ‘गगनयान’ भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है। इस मिशन के तहत तीन सदस्यीय भारतीय दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा में तीन दिन के लिए भेजने और सुरक्षित वापस लाने की योजना है।
कैप्सूल की वापसी
ड्रोग पैराशूट अंतरिक्ष कैप्सूल की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाता है। यह पहले खुलकर कैप्सूल की गति कम करता है और उसे स्थिर करता है, ताकि मुख्य पैराशूट सुरक्षित तरीके से खुल सके। इस बार परीक्षण में पैराशूट को वास्तविक उड़ान में आने वाले अधिकतम भार से भी अधिक दबाव में परखा गया, जिससे इसकी अतिरिक्त सुरक्षा क्षमता सिद्ध हुई।
परीक्षण के दौरान पैराशूट को असली मिशन से अधिक दबाव वाली स्थिति में जांचा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कठिन परिस्थितियों में भी यह प्रणाली सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम करेगी। इस सफलता से भारत ने उच्च क्षमता वाले पैराशूट के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण में अपनी तकनीकी दक्षता प्रदर्शित की है।