
इंदौर। वरिष्ठ कार्यालय इंदौर के जांच दल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने धार जिले के प्रधान डाकघर में खाताधारकों की मेहनत की कमाई से जुड़े एक गंभीर मामले ने पूरे डाक विभाग को सतर्क कर दिया है। जहां एक ओर आम नागरिक केंद्र सरकार के डाक विभाग पर भरोसा कर अपने भविष्य की बचत पोस्ट ऑफिस में सुरक्षित रखते हैं, वहीं कुछ कर्मचारियों ने उन्हीं बचत खातों में कथित रूप से अनियमितता कर निजी लाभ उठाने का मामला सामने आया।
गोपनीय शिकायत के आधार पर खुली फाइलों ने डाकघर में चल रहे बड़े खेल की ओर इशारा किया। वरिष्ठ कार्यालय इंदौर के निर्देश पर जांच शुरू होते ही जिला मुख्यालय स्थित प्रधान डाकघर में पदस्थ मुख्य पोस्ट मास्टर सहित चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। निलंबन की यह कार्रवाई सीधे की गई, जिससे मामले की गंभीरता स्पष्ट होती है। बीते एक सप्ताह से तीन सदस्यीय जांच दल गोपनीय रूप से दस्तावेजों की गहन पड़ताल में जुटा है। बताया जा रहा है कि एक उपभोक्ता को परिपक्व जमा राशि के भुगतान में हुई गड़बड़ी के बाद पूरे प्रकरण का खुलासा हुआ।
प्रधान डाकघर से एक लाख से अधिक खाताधारक जुड़े हैं। ऐसे में जांच दल हटाए गए कर्मचारियों के पूरे पदस्थी कार्यकाल के दौरान हुए लेन-देन और खातों की बारीकी से जांच कर रहा है। लगातार नए तथ्य सामने आने के कारण जांच की प्रारंभिक 10 दिन की अवधि भी बढ़ा दी गई।
जांच दल का नेतृत्व देवेश औसारी कर रहे हैं, जिनके साथ इंस्पेक्टर राकेश वर्मा और मुकेश ओघाड़ी शामिल हैं। अधीक्षक ओमप्रकाश चौहान के मार्गदर्शन में प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, 1 दिसंबर को जांच दल गठित किया गया था और 11 दिसंबर को मुख्य पोस्ट मास्टर कुणाल मकवाना, डिप्टी पोस्ट मास्टर निर्मल सिंह पंवार, डाक सहायक अंबाराम एवं महिपाल को निलंबित किया गया। विभाग का कहना है कि खाताधारकों की राशि पूरी तरह सुरक्षित है और जांच पूरी होते ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।