
इंदौर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग क्रमांक-एक ने ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनी ‘अमेज़न’ के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय दिया। जागरूक उपभोक्ता समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार अमोलिया ने परिवादी की ओर से केस लड़ा। आयोग की सदस्य डॉ निधि बारंगे ने आदेश पारित किया। आयोग की सदस्य डॉ निधि बारंगे ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रकरण में उपभोक्ता को सेवा में कमी का सामना करना पड़ा, जिसके लिए कंपनी उत्तरदायी है।
कंपनी को सेवा में कमी की उत्तरदायी माना
परिवादी मयंक जैन यह प्रकरण दायर किया था। परिवाद के अनुसार, उसने ‘अमेज़न’ की वेबसाइट से अगस्त 2021 में दो परिधान उत्पाद (डिज़ाइनर लहंगा चोली) ऑनलाइन ऑर्डर किए थे। इनकी कीमत ₹97,998 थी। उत्पाद प्राप्त होने पर वे अपेक्षित गुणवत्ता एवं विवरण के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके बाद परिवादी ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उत्पाद लौटा दिए। इसके बावजूद कंपनी ने अभी तक उत्पादों की भुगतान राशि वापस नहीं की।
आयोग की सदस्य के समक्ष सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि परिवादी ने समय-समय पर कंपनी से संपर्क किया। लेकिन, कंपनी ने संतोषजनक समाधान नहीं किया। सदस्य डॉ निधि बारंगे ने यह भी माना कि अमेजन द्वारा प्रस्तुत तर्क एवं दस्तावेज़ सेवा में कमी को नकारने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
दोनों उत्पादों की राशि लौटाने के निर्देश
इस प्रकरण की सुनवाई विकास राय तथा कुंदन सिंह चौहान एवं आयोग की सदस्य डॉ निधि बारंगे की पीठ द्वारा की गई। आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत निर्णय पारित करते हुए अमेज़न को निर्देशित किया कि परिवादी को दोनों उत्पादों की कुल राशि एक लाख रुपए 45 दिन में लौटाई जाए तथा उक्त राशि पर 21 दिसंबर 2021 से भुगतान की तिथि तक 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। साथ ही मानसिक कष्ट के प्रतिकर स्वरूप 10 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए अतिरिक्त रूप से अदा किए जाएं।
आयोग ने यह भी निर्देश दिए कि आदेश की प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए तथा आयोग की वेबसाइट पर इसे प्रकाशित की जाए। यह निर्णय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ऑनलाइन कंपनियाँ भी उपभोक्ता कानून के दायरे में पूर्णतः उत्तरदायी हैं।