
भोपाल। प्रदेश में अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाने के बीच सरकार नई आबकारी नीति में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। अवैध शराब के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए अब शराब दुकानों के लाइसेंस को लेकर ठेकेदारों की सीमा तय की जा सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी भी ठेकेदार को एक निर्धारित संख्या से अधिक शराब दुकानों के लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे। इससे न केवल एकाधिकार खत्म होगा, बल्कि नए लोगों को भी इस व्यवसाय में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने हाल ही में शराब नीति को लेकर हुई चर्चा में इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वर्ष 1915 में बने आबकारी अधिनियम में संशोधन किया जा सकता है। यह अधिनियम मादक पदार्थों के निर्माण, परिवहन, बिक्री और भंडारण को नियंत्रित करता है। इसमें मौजूद प्रावधानों को समयानुकूल और अधिक सशक्त बनाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि कार्रवाई में तेजी लाई जा सके।
वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार आबकारी अधिनियम की कई धाराएं वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। इन्हें संशोधित कर अवैध शराब कारोबार पर सख्त कार्रवाई और राजस्व वृद्धि का रास्ता तैयार किया जा रहा है। बताया गया कि मध्यप्रदेश में आबादी के अनुपात में शराब दुकानों की संख्या राजस्थान और उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों की तुलना में कम है। लंबे समय से नई दुकानों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है।
नई नीति के प्रारूप में सीधे तौर पर नई दुकानों का उल्लेख नहीं है, लेकिन उप-दुकान खोलने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। हालांकि अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होने के बाद ही स्पष्ट होगा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी ठेकेदारों के लिए दुकानों की लिमिट तय की गई थी, जिसे अब और सख्त किए जाने की संभावना है।