
विशेष रिपोर्ट विक्रम सेन
तेहरान । ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक, सामाजिक और कूटनीतिक संकट से गुजर रहा है। 28 दिसंबर से महंगाई, बेरोज़गारी और जीवन-यापन की बदहाल स्थिति के विरुद्ध शुरू हुआ जनप्रदर्शन अब सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन को उखाड़ फेंकने के आंदोलन में परिवर्तित हो चुका है। पूरे देश में लाखों लोग सड़कों पर हैं और हालात गृहयुद्ध जैसे बनते जा रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि जो भी देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे अमेरिका के साथ किए जाने वाले किसी भी व्यापार पर 25 प्रतिशत टैरिफ देना होगा। यह आदेश तत्काल लागू होकर अंतिम और निर्णायक है।
इससे ईरान के आर्थिक रिश्ते और संबंध भी कई देशों से ख़राब होना तय हैं। ईरान में चहुंओर से बढ़ते दबाव और हमलों के दबाव से सरकार ने देशव्यापी इंटरनेट और संचार सेवाएँ लगभग पूरी तरह बंद कर दी हैं, जिससे वास्तविक स्थिति की जानकारी सीमित हो गई है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, मानवाधिकार संगठनों और स्वतंत्र मीडिया के अनुसार, हिंसक दमन में मरने वालों की संख्या सैकड़ों से लेकर हजारों तक बताई जा रही है। कुछ विपक्षी सूत्र यह आंकड़ा 2,000 से अधिक बताते हैं, जबकि अन्य रिपोर्टें इसे 10,000 से ऊपर होने का दावा कर रही हैं।
सरकारी दमन और वैश्विक प्रतिक्रिया
ईरानी सुरक्षा बलों पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाईं, हजारों लोगों को गिरफ्तार किया और अस्पतालों तक को निगरानी केंद्र में बदल दिया। ईरानी नेतृत्व इन आंदोलनों को “विदेशी साजिश” करार देते हुए अमेरिका और पश्चिमी देशों पर भड़काने का आरोप लगा रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिका, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की तीखी निंदा की है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा,
“ईरान के लोग एक दमनकारी शासन से मुक्ति चाहते हैं। दुनिया उनके साथ खड़ी है।”
अमेरिका-ईरान टकराव के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ तीन विकल्पों पर विस्तृत ब्रीफिंग दी गई है,
प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई
व्यापक साइबर ऑपरेशन
प्रदर्शनकारियों के समर्थन हेतु मनोवैज्ञानिक व रणनीतिक अभियान
हालांकि, अंतिम निर्णय अभी लंबित है और कूटनीतिक रास्ते खुले बताए जा रहे हैं।
अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की है, जिससे हालात की गंभीरता और स्पष्ट हो जाती है।
ईरान की चेतावनी और कड़ा रुख
ईरान के पुलिस प्रमुख अहमदरेज़ा रादान ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि
“अगर अमेरिका दोबारा गलती करता है, तो इस बार उसका जवाब कहीं अधिक कठोर होगा।”
सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित संदेश में दावा किया कि सरकार ने “अमेरिकी साजिश को विफल कर दिया है” और आंदोलनकारियों को “विदेशी भाड़े के सैनिक” बताया।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक भूचाल
ईरान ने ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और इटली के राजदूतों को तलब कर उनके देशों पर “आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप” का आरोप लगाया है। इधर अमेरिका, इज़राइल और कई यूरोपीय देशों के नेता खुलकर ईरानी सरकार के विरुद्ध बयान दे रहे हैं।
साइबर और सैन्य खतरे
हालाँकि अब तक ईरान के परमाणु ठिकानों पर किसी पुष्ट साइबर हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ऐसे विकल्पों पर सक्रियता से विचार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट क्षेत्रीय युद्ध और वैश्विक अस्थिरता की ओर बढ़ सकता है।
बहरहाल ईरान अब केवल एक आंतरिक आंदोलन का सामना नहीं कर रहा, बल्कि यह संकट वैश्विक शक्ति संतुलन की परीक्षा बन चुका है। आने वाले कुछ सप्ताह मध्य-पूर्व की दिशा और विश्व राजनीति का भविष्य तय कर सकते हैं।
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को धमकी दी है। सोमवार को उन्होंने घोषणा की कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगेगा। इससे भारत पर काफी असर पड़ सकता है। यह भारत के लिए और चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि रूसी तेल को खरीदने की वजह से उसके ऊपर 50% टैरिफ लगा हुआ है।