
इंदौर। देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट को बीते सप्ताह भर में करीब दो करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा। विमानों की लगातार उड़ानें रद्द होने से होटल, पर्यटन और टैक्सी व्यवसाय के साथ एयरपोर्ट की राजस्व व्यवस्था भी प्रभावित हुई। इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल होने का सिलसिला अब भी जारी है और पिछले दो दिनों से रोज एक से दो उड़ानें निरस्त हो रही हैं।
उड़ानें रद्द होने का असर सिर्फ यात्रियों पर ही नहीं, बल्कि इंदौर एयरपोर्ट अथॉरिटी की आय पर भी पड़ा। इंदौर एयरपोर्ट से रोज करीब 12 से 14 हजार यात्री यात्रा करते हैं, जिनमें आधे आने और आधे जाने वाले होते हैं। इंदौर से संचालित उड़ानों में इंडिगो का नेटवर्क सबसे बड़ा है और यहां की आधे से अधिक उड़ानें इसी एयरलाइन पर निर्भर हैं। 4 से 8 दिसंबर के बीच इंडिगो की कई उड़ानें प्रभावित रहीं, जिससे इन दिनों में यात्रियों की औसत संख्या 40 से 45 प्रतिशत तक घट गई।
5 दिसंबर को स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही, जब करीब 5 से 6 हजार यात्रियों को उड़ानें रद्द होने के कारण एयरपोर्ट से लौटना पड़ा। इंडिगो ने यात्रियों को टिकट की पूरी राशि वापस कर दी, लेकिन उड़ानें निरस्त होने से एयरपोर्ट अथॉरिटी को मिलने वाला शुल्क लगभग शून्य हो गया, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
अथॉरिटी की आय में कमी
किसी भी विमानन कंपनी का टिकट बुक कराने पर यात्रियों से यूजर डेवलपमेंट फीस (यूडीएफ), रीजनल कनेक्टिविटी चार्ज (आरसीसी) और एविएशन सिक्योरिटी फीस मिलाकर औसतन 700 रुपए से अधिक शुल्क वसूला जाता है। यह शुल्क अलग-अलग एयरपोर्ट पर अलग-अलग होता है, जिसे एयरपोर्ट अथॉरिटी यात्री सुविधाओं के रखरखाव और विस्तार पर खर्च करती है। सामान्य दिनों में प्रतिदिन मिलने वाले यात्री शुल्क के मुकाबले संकट के दिनों में प्रतिदिन लगभग 5 हजार से 6 हजार यात्रियों से शुल्क नहीं मिल पाया। यानी एयरपोर्ट को रोजाना लगभग 35-40 लाख रुपए तक की चपत लगी। सूत्रों की माने तो एयरपोर्ट अथारिटी को पांच दिनों का कुल नुकसान 1.75 से 2 करोड़ रुपए या उससे अधिक होने का अनुमान है।
यात्री संख्या आधी रह गई
एयरपोर्ट के टैक्सी वालों का कहना है कि उस समय लोग आए और अंदर ही एयरपोर्ट में फंसे रहे। कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों को एयरपोर्ट पर लेने बुला लिया। लोगों को फ्लाइट निरस्त होने की सूचना पहले मिल गई। लोग आए ही नहीं, इससे हमें सवारी नहीं मिली। अब जाकर हालात सामान्य हुए हैं। इसके अलावा पार्किंग को लेकर भी बड़ा नुकसान हुआ है। ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि इस संकट से बड़ी संख्या में पैकेज और होटल रूम भी निरस्त हुए। इससे भी काफी नुकसान हुआ है। होटलों ने क्रेडिट नोट बनाकर दिए हैं, लेकिन उससे मनचाही डेट पर बुकिंग नहीं हो पा रही है।