
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा निर्धारण को लेकर एक अहम फैसला सुनाया। फैसले में स्पष्ट किया कि पीड़ित की शैक्षणिक योग्यता और भविष्य की आय पर संभावित असर को नजरअंदाज कर केवल न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मुआवजा तय करना गलत है।
हाईकोर्ट ने फिटर कोर्स के तीसरे सेमेस्टर के छात्र को 100% दिव्यांगता के मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ की ओर से तय मुआवजा राशि को 40,53,617 रुपए से बढ़ाकर 75,20,817 रुपए कर दिया।
इस मामले में राकेश कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रिब्यूनल की ओर से तय मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए बढ़ाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि वाहन दुर्घटना में उसे 100% स्थायी दिव्यांगता हो गई, जिससे उसका भविष्य पूरी तरह प्रभावित हो गया। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने उसकी आय का आकलन राज्य में लागू न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया, जो न केवल अव्यावहारिक है बल्कि न्यायसंगत भी नहीं है।
याचिकाकर्ता तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहा
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि हादसे के समय वह तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहा था और फिटर कोर्स के तीसरे सेमेस्टर का छात्र था। ऐसे में उसकी संभावित आय का आकलन उसकी शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए था। इसके अलावा मुआवजा तय करते समय भविष्य की संभावनाओं और करियर पर पड़े प्रभाव पर भी कोई विचार नहीं किया गया।
दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराते हुए मुआवजा बढ़ाने की याचिका का विरोध किया। कंपनी का कहना था कि ट्रिब्यूनल ने कानून के अनुसार मुआवजा तय किया है और इसमें किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के लिए, जो पेशेवर करिअर की तैयारी कर रहा हो, केवल न्यूनतम मजदूरी के आधार पर आय तय करना गलत और अव्यावहारिक है। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रिब्यूनल ने शैक्षणिक योग्यता और भविष्य की कमाई पर संभावित असर को नजरअंदाज कर गंभीर भूल की है।
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल की ओर से तय 40,53,617 रुपए के मुआवजे में 34,67,200 रुपए की बढ़ोतरी करते हुए कुल मुआवजा राशि 75,20,817 रुपए निर्धारित की। इसके साथ बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह यह राशि दो माह के भीतर 9% वार्षिक ब्याज सहित मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ में जमा कराए। ट्रिब्यूनल को आदेश दिया गया कि जमा राशि को दावाकर्ता को शीघ्र जारी किया जाए।