
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी अमले की घटती संख्या को लेकर सियासत तेज हो गई है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में 3881 शासकीय कर्मचारी कम हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि आम जनता के जीवन में ‘आनंद’ लाने का दावा करने वाला आनंद विभाग पूरे प्रदेश में महज एक कर्मचारी के भरोसे चल रहा है।
यह विभाग पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मकता और खुशहाली बढ़ाना बताया गया था। लेकिन, मौजूदा स्थिति में विभाग का ढांचा बेहद सीमित नजर आ रहा है।
बड़े विभागों में भी गिनती के लोग
पर्यटन जैसे अहम क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। प्रदेश में पर्यटन के प्रमोशन की जिम्मेदारी सिर्फ 8 कर्मचारियों पर है। निवेश, उद्योग और रोजगार से जुड़े औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग में भी पूरे प्रदेश के लिए केवल 20 कर्मचारी कार्यरत हैं। राज्य के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र वल्लभ भवन में संचालित कई विभागों में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के पद खाली बताए जा रहे हैं। कुछ विभागों में तो तृतीय और चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं।
सरकारी कर्मचारियों की लगातार घटती संख्या
सार्वजनिक उपक्रमों और अर्द्ध शासकीय संस्थानों में कर्मचारियों की संख्या 2024 में 33,942 थी, जो 2025 में घटकर 30,495 रह गई। नगरीय निकायों में भी संख्या 29,966 से घटकर 29,516 हो गई। ग्रामीण स्थानीय निकायों में 5,422 से घटकर 5,384 कर्मचारी रह गए। विकास प्राधिकरणों और विश्वविद्यालयों में भी पदों में कमी दर्ज की गई है। कुल मिलाकर 2024 में कर्मचारियों की संख्या 6,81,278 थी, जो 2025 में घटकर 6,77,397 रह गई। प्रदेश में कुल नियमित कर्मचारियों में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। आंकड़ों के अनुसार 4 लाख 24 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों में से करीब 1 लाख 28 हजार महिलाएं हैं।