
भोपाल। पिछले तीन महीने के भीतर मप्र भाजपा में हुए संगठनात्मक बदलावों का असर अब पार्टी के भीतर भी दिखाई देने लगा है। सबसे बड़ा बदलाव प्रदेश कार्यालय में नेताओं के ठाठ-बाट में देखने को मिल रहा। अब न नाश्ते से नेताओं के टेबलें सज रही हैं और न बाजार से मनपसंद खाना आ रहा है। यहां तक के थोक में आने वाले नारियल पानी भी बंद हो गए।
आगंतुकों का भी वीवीआईपी सत्कार नहीं
प्रदेश कार्यालय में अन्य फिजूलखर्ची भी रुक गई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सादगी का असर अब पार्टी में दिखाई देने लगा। इसकी शुरूआत खंडेलवाल ने खुद से की है। वे न तो पार्टी के वाहन का उपयोग करते हैं और न अन्य किसी तरह की सुविधाएं लेते हैं। अब भाजपा कार्यालय में आगंतुकों का भी वीवीआईपी सत्कार नहीं हो रहा। साधारण कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेताओं तक के लिए एक ही तरह के चाय-नाश्ते का बंदोबस्त कर दिया है। पहले पार्टी पदाधिकरी, कार्यालय स्टाफ एवं अन्य के लिए चाय की व्यवस्था थी, लेकिन अब सभी के लिए चाय-कॉफी की व्यवस्था कर दी गई।
पैक्ड वाटर की जगह अब पानी की बोतल
कार्यालय परिसर में आने वाले आम कार्यकर्ता या आम नागरिक के लिए मशीन से चाय की व्यवस्था है। साथ ही पैक्ड वाटर की जगह अब पानी की बोतल, गिलास और जग रखवाएं गए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपने स्तर से किसी तरह की रोक नहीं लगाई, लेकिन उनकी साधारण जीवन शैली एवं सुविधाओं से दूरी का असर दूसरे नेताओं पर दिखाई दिया है। जो नेता पार्टी के खर्च पर वाहन सुविधाएं लेते थे। उसमें कटौती हो गई है। सिर्फ वे नेता ही पार्टी के वाहन का उपयोग कर रहे हैं, जिन्हें पार्टी की ओर से सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।