
इंदौर। चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराजगी के बाद उनके पद से हटाकर लाइन अटैच कर दिया गया है। हाल ही में एक प्रकरण की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने टीआई द्वारा प्रस्तुत हलफनामे पर गंभीर आपत्ति जताई थी। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि वे इस कुर्सी पर बैठने के योग्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप भी मचा था।
पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में वर्ष 2023-24 के दौरान दर्ज मामलों में ‘पॉकेट विटनेस’ की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस की विवेचना पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप हो। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को प्रशासनिक कार्यों से हटाकर लाइन अटैच कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि पूरे मामले में न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जा रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चार की जगह आठ केस बनाने का गलत हलफनामा
एक आरोपी पर चार केस की जगह आठ केस बनाने का गलत हलफनामा देने के मामले में 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस केस में आरोपी अनवर हुसैन की जमानत पहले ही मंजूर हो चुकी थी। इसी केस में असद वारसी ने इंटर विनर बनकर टीआई की कई करतूतों की पोल खोली। इसमें इंटर विनर वारसी की ओर से अधिवक्ता संजय हेगड़े ने बताया कि 25 नवंबर को पॉकेट गवाह का मुद्दा आया था और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, लेकिन इसके बाद भी इनके द्वार फिर 30 नवंबर को केस में पॉकेट गवाह पेश किए गए।
ऑर्डर अपलोड होने का इंतजार नहीं करें
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस एहसानुद्दीन अमानतउल्ला और जस्टिस आर महादेवन ने इसे गंभीरता से लिया। कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिए कि वह शासन, पुलिस कमिश्नर को सूचित करें और संबंधित टीआई पटेल को लाइन अटैच किया जाए। भले ही सुप्रीम कोर्ट का आर्डर कभी भी अपलोड हो। लेकिन, ऑर्डर अपलोड होने का इंतजार नहीं करें, उन्हें लाइन अटैच किया जाए। साथ ही अगले आदेश तक उन्हें किसी भी थाने में कोई काम नहीं दिया जाए। इसका पालन सुनिश्चित कराया जाए।
यह है टीआई का पूरा मामला
यह पूरा मामला अनवर हुसैन की जमानत याचिका से खुला। हुसैन पर पुलिस ने हाईकोर्ट में चार की जगह आठ अपराध बताए, इसके चलते हाईकोर्ट में जमानत नहीं हुई। मामला सुप्रीम कोर्ट गया। इसमें पुलिस ने गलती मानी कि एक ही नाम को दो आरोपी होने से आठ केस गलती से बता दिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर माना और फटकार लगाई।