
इंदौर। इंदौर और मध्य भारत के लिए एशियन वॉटरबर्ड सेंसस (AWC) 2026 केवल पक्षियों की गिनती नहीं, बल्कि आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अभियान बनने जा रहा है। 3 और 4 जनवरी 2026 को प्रस्तावित इस राज्यव्यापी सेंसस की तैयारियों को लेकर मध्य प्रदेश वन विभाग, भोपाल ने 19 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सभी वन मंडलों के लिए कार्यप्रणाली और दिशा-निर्देश तय किए।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण, भूमि उपयोग में बदलाव और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के चलते इंदौर जिले की झीलें, तालाब और मौसमी जलभराव क्षेत्र लगातार संवेदनशील होते जा रहे हैं। ऐसे में जलपक्षियों की प्रजातियां और उनकी संख्या इन आर्द्रभूमियों की वास्तविक स्थिति का सटीक संकेत देती हैं। नियमित और वैज्ञानिक तरीके से की जाने वाली गणनाएं प्रदूषण, अतिक्रमण, जल गुणवत्ता में गिरावट और आवास क्षरण जैसी समस्याओं की समय रहते पहचान में सहायक होती हैं।
एशियन वॉटरबर्ड सेंसस की खास पहचान इसका नागरिक विज्ञान आधारित मॉडल है, जिसमें वन विभाग के साथ-साथ पक्षी प्रेमी, पर्यावरण कार्यकर्ता, विद्यार्थी और आम नागरिक भागीदारी करते हैं। eBird डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज आंकड़े वैश्विक डेटाबेस से जुड़ते हैं, जिससे इंदौर के आंकड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना योग्य बनते हैं। सेंसस के दौरान मानकीकृत डिजिटल प्रोटोकॉल अपनाए जाएंगे। प्रत्येक टीम में कम से कम तीन सदस्य होंगे और वेटलैंड असेसमेंट फॉर्म भरना अनिवार्य रहेगा।
अधिकारियों का मानना है कि जनभागीदारी के बिना आर्द्रभूमि संरक्षण संभव नहीं है। इंदौर जैसे शहरी क्षेत्र में यह अभियान जैव विविधता, बाढ़ नियंत्रण और भूजल संरक्षण के लिए नई दिशा तय करेगा।