
वड़ोदरा। दाहोद जिले में 71 करोड़ के मनरेगा घोटाले में राज्य मंत्री बचू भाई खाबड़ के दोनों बेटे और भतीजे को पुलिस ने गिरफ्तार किया हैं।
इन पर आरोप है कि इनकी फर्जी फर्मों को मनरेगा योजना में बिना टेंडर करोड़ों का भुगतान किया गया, सड़कों तथा अन्य विकास योजना का काम सिर्फ कागज़ों पर हुआ था।
दाहोद पुलिस उपअधीक्षक जगदीश सिंह भंडारी ने बताया कि इस घोटाले में संलिप्तता की पुष्टि के बाद किरण खाबड़ को गिरफ्तार किया गया है।
विस्तृत जानकारी अनुसार गुजरात राज्य के कृषि और पंचायत राज राज्य मंत्री बचू खाबड़ के छोटे बेटे किरण खाबड़ को सोमवार सुबह वडोदरा-हालोल हाईवे पर गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन लाया गया है। इससे पहले शनिवार को मंत्री के बड़े बेटे बलवंत खाबड तथा भतीजे को भी मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।
इन पर दाहोद ज़िले में हुए 71 करोड़ रुपये के मनरेगा घोटाले में शामिल होने का आरोप है।
इस मामले में अब तक 11 गिरफ्तारी की जानकारी मिली हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि किरण खाबड़ का संबंध ‘श्री राज ट्रेडर्स’ नाम की एक सप्लाई फर्म से है, जिसे बिना किसी टेंडर के मनरेगा कार्यों के लिए 30.04 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, बलवंत खाबड़ ‘श्री राज कंस्ट्रक्शन कंपनी’ से जुड़े हैं, जिसे 82 लाख रुपये मिले।
इन दोनों भाइयों को कुल घोटाले की रकम का 40 फीसदी हिस्सा मिला।
देवगढ़ बारिया निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री बच्चूभाई खाबड़ वर्तमान में पंचायत और कृषि राज्य मंत्री हैं।
बिना टेंडर के मिली करोड़ों की डील
पुलिस ने इस मामले में जिन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें ‘एन जे एंटरप्राइज’ नाम की कंपनी के मालिक पार्थ बारिया और दाहोद के डिप्टी डिस्ट्रिक्ट डवलपमेंट ऑफिसर रासिक राठवा शामिल हैं। ‘एन जे एंटरप्राइज’ को बिना किसी अनुबंध के 5.19 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जो इस घोटाले के सबसे बड़े हिस्सेदारों में एक है।
जांच में सामने आए 33 फर्जी फर्मों के नाम
जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) ने इस मामले की गहराई से जांच की, जिसमें पता चला कि क़रीब 33 फर्जी फर्में बिना बोली प्रक्रिया के मनरेगा सामग्री की सप्लाई में शामिल थीं। ये फर्में देवगढ़ बारिया और धनपुर तालुका में हुए कार्यों में शामिल रहीं। कई मामलों में सड़कें केवल कागज़ों पर बनीं, ज़मीन पर कोई काम नहीं हुआ।
यानी इन फर्मों ने कई बार ऐसी सामग्री सप्लाई करने का दावा किया, जो ज़मीनी तौर पर कभी पहुंची ही नहीं।
मनरेगा के तहत भुगतान का दावा करने के लिए फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और जाली दस्तावेज जमा कर सन 2021 से 2024 के बीच करोड़ों रुपये हड़पने के वास्ते जिले की कम से कम दो तहसील में जिनमें कुवा, रेधाना और सिमामोई जैसे गांवों को पूरी हो चुकी परियोजनाओं के लाभार्थियों के रूप में गलत तरीके से रिपोर्ट किया गया था। हालांकि, जांच से पता चला कि बहुत कम या कोई वास्तविक काम नहीं किया गया था।
सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत की।
मनरेगा के अफसरों ने निभाई मिलीभगत की भूमिका
दिलीप चौहान, जो कि देवगढ़ बारिया में मनरेगा के सहायक कार्यक्रम अधिकारी (APO) थे, इस पूरे घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता माने जा रहे हैं। वहीं, रासिक राठवा उस समय धनपुर तालुका के विकास अधिकारी थे। दोनों ने खाबड़ भाइयों की फर्जी कंपनियों को सप्लाई के काम दिलवाए और नियमों को ताक पर रखकर भुगतान भी करवाया।
उल्लेखनीय हैं कि जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) द्वारा क्षेत्रीय निरीक्षणों के दौरान घोटाले का पर्दाफाश किए जाने के बाद पुलिस जांच शुरू हुई, जिसमें पता चला कि सड़कों और छोटे बांध जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भुगतान किया गया था, जो वास्तव में कभी बनाए ही नहीं गए थे।
बता दें कि पिछले महीने दर्ज करवाई गई प्राथमिकी में सरकारी कर्मचारियों सहित अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और विश्वासघात के आरोप शामिल हैं।
मामले की जांच जारी है।
वहीं दूसरी तरफ आदिवासी नेता और पूर्व विधायक छोटू वसावा ने आरोप लगाते हुए कहा है कि आसपास स्थित जिलों में नरेगा योजना में 1500 करोड़ से अधिक का घोटाला किया गया है।
कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने कहा, ‘दाहोद में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार की बार-बार शिकायतों के बावजूद सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया, जहां परियोजनाओं को ज़मीन पर क्रियान्वित नहीं किया गया है, लेकिन बिलों को मंजूरी दे दी गई है। कांग्रेस बार-बार लिखित और मौखिक रूप से, साथ ही विधानसभा में प्रश्नों के माध्यम से इस मुद्दे को उठाती रही है।’
उल्लेखनीय हैं कि केन्द्र सरकार ग्रामीण भारत के विकास पर जोर दे रही है, लेकिन बजट का सही इस्तेमाल न हो पाना एक बड़ी चुनौती है। वित्त वर्ष 20025-26 के आम बजट में मनरेगा और पीएम ग्रामीण आवास योजना को सबसे ज्यादा फंड मिला है, जिससे गांवों में रोजगार और आवास में सुधार होगा।
ग्रामीण विकास विभाग को केंद्र ने 1,87,755 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो 2024-25 के संशोधित अनुमान से 8% अधिक है।
इस बजट में दो प्रमुख योजनाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है:
मनरेगा (MGNREGA): 46% यानी करीब 86 हजार करोड़ रुपए।
जबकि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (PMAY-G): 29% में आवंटित किए गए हैं।
सरकार की और से बजट में निर्धारित वित्तीय प्रावधान के आंकड़े से स्पष्ट है कि सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण भारत का विकास और गरीबी उन्मूलन है।
मनरेगा योजना को जाने;
इस योजना का उद्देश्य एक वित्तीय वर्ष में प्रति परिवार कम से कम 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन परिवारों की आजीविका के अवसरों में वृद्धि की जा सके, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल कार्य करने के लिए तैयार हैं, जो शारीरिक श्रम के माध्यम से किया जा सकता है।
यह दैनिक मजदूरी मौजूदा 349 रुपये से बढ़ाकर 370 रुपये प्रति व्यक्ति कर दी गई है, जो एक महत्वपूर्ण 6% की वृद्धि दर्शाती है। यह संशोधित मजदूरी दरें वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम दिन अर्थात 1 अप्रैल, 2025 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगी।