

इंदौर। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में इस बार इंदौर के कई युवाओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए इन अभ्यर्थियों ने कठिन मेहनत और लगातार प्रयास के दम पर सफलता हासिल की। किसी ने तीसरे प्रयास में मंजिल पाई, तो किसी ने कई असफलताओं के बाद हार नहीं मानी और आखिरकार रैंक हासिल कर ली।
तीसरे प्रयास में अनन्या ने बनाई जगह
पूर्वी इंदौर के संजना पार्क की रहने वाली अनन्या शर्मा ने यूपीएससी में 13वीं रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। यह उनकी तीसरी कोशिश थी। उनकी स्कूली पढ़ाई इंदौर के डेली कॉलेज से हुई, जबकि चार साल तक उन्होंने पंजाब के नाभा स्थित पंजाब पब्लिक स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से अर्थशास्त्र ऑनर्स में स्नातक किया। तैयारी के दौरान अनन्या रोज लगभग 10 से 13 घंटे पढ़ाई करती थीं। पढ़ने की आदत और अलग-अलग विषयों पर चर्चा करने की रुचि ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया।
उन्होंने पहले संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा भी दी थी, जिसमें उन्हें ऑल इंडिया स्तर पर पांचवीं रैंक मिली थी। उनके पिता पंजाब के नाभा में एक स्कूल के प्राचार्य हैं, जबकि मां इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में प्रोफेसर हैं।
हिंदी माध्यम से पढ़े अक्षत ने पाई 173वीं रैंक
अक्षत बलद्वा की शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल में हिंदी माध्यम से हुई। बारहवीं तक वे हिंदी माध्यम से ही पढ़े। बचपन से ही उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। स्कूल के बाद उन्होंने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) पास कर नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में एलएलबी में प्रवेश लिया। हिंदी माध्यम से पढ़कर सीधे अंग्रेजी माहौल में पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था। कॉलेज के शुरुआती वर्षों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा और अंक भी उम्मीद के अनुसार नहीं आए।
उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और धीरे-धीरे खुद को नए माहौल के अनुसार ढाल लिया। कॉलेज के पांचवें वर्ष में उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। उस समय एक ओर लॉ कॉलेज की पढ़ाई का दबाव था और दूसरी ओर सिविल सेवा की तैयारी। वर्ष 2025 में उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया और उसी साल पहले ही प्रयास में 173वीं रैंक हासिल कर ली।
परिणाम से पहले निराशा भी झेली
अक्षत के अनुसार परिणाम आने से तीन दिन पहले तक वे काफी निराश थे। उन्हें लगने लगा था कि यह यात्रा मानसिक रूप से बहुत कठिन हो गई है। उस समय उन्होंने खुद को संभाला और अपने मन से ही बातचीत कर खुद को मजबूत किया।
वे कहते हैं कि तैयारी के दौरान आत्मविश्वास और आत्मप्रेरणा सबसे अहम होती है। दूसरों की सलाह अपनी जगह है, लेकिन असली ताकत तब मिलती है जब व्यक्ति खुद को भीतर से संभालता है। इस दौरान उनके परिवार ने भी पूरा साथ दिया। उनकी मां लगातार उनके साथ रहीं और उनका हौसला बढ़ाती रहीं।
दीक्षा ने पूरा किया मां का सपना
दीक्षा चौरसिया ने यूपीएससी में 44वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के साथ उन्होंने अपनी मां का सपना भी पूरा किया। उनकी मां डॉक्टर हैं और युवावस्था में सिविल सेवा में जाना चाहती थीं। वही सपना आगे चलकर दीक्षा की प्रेरणा बना। बारहवीं तक की पढ़ाई इंदौर में करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से इतिहास ऑनर्स में स्नातक किया। फिलहाल वे पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातकोत्तर भी कर रही हैं।
दीक्षा ने वर्ष 2022 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सकीं। दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा में मात्र 12 अंकों से पीछे रह गईं। तीसरे प्रयास में फिर प्रीलिम्स नहीं निकल पाया, लेकिन चौथे प्रयास में उन्होंने 44वीं रैंक हासिल कर सफलता पा ली।
समीक्षा ने नौकरी छोड़कर हासिल की 56वीं रैंक
समीक्षा द्विवेदी ने यूपीएससी में 56वीं रैंक प्राप्त की है। उन्होंने निजी स्कूल से बारहवीं पास करने के बाद कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया और सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया। करीब तीन साल सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने के बाद उन्होंने एमबीए किया और कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी काम किया। इसी दौरान समाज के लिए कुछ करने की इच्छा मजबूत हुई। उन्होंने तय किया कि व्यवस्था के भीतर रहकर बदलाव लाना है, इसलिए वर्ष 2020 में यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
लगातार मेहनत और धैर्य के बाद पांचवें प्रयास में उन्हें सफलता मिली और उन्होंने 56वीं रैंक हासिल कर ली।