
एजेंसियां
वॉशिंगटन । वैश्विक शक्ति संतुलन को लेकर चर्चित अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट World Population Review ने वर्ष 2026 के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की सूची जारी कर दी है। इस रैंकिंग ने भारत सहित कई उभरती शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बार भारत शीर्ष 10 देशों की सूची से बाहर हो गया है और उसे 12वां स्थान दिया गया है।
रैंकिंग में संयुक्त राज्य अमेरिका एक बार फिर पहले स्थान पर काबिज है, जबकि रूस को दूसरा और चीन को तीसरा स्थान मिला है।
कैसे तय हुई ‘शक्ति’ की रैंकिंग
World Population Review का दावा है कि यह सूची केवल सैन्य ताकत के आधार पर नहीं, बल्कि कई व्यापक मानकों के समन्वित आकलन से तैयार की गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं;
आर्थिक क्षमता
सैन्य संसाधन और रणनीतिक शक्ति
तकनीकी प्रगति
जनसांख्यिकीय प्रभाव
शासन की स्थिरता
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रभावी भागीदारी
रिपोर्ट के अनुसार, देशों को पाँच मुख्य विशेषताओं
सैन्य गठबंधन, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, राजनीतिक प्रभाव, आर्थिक प्रभाव और नेतृत्व क्षमता—के आधार पर परखा गया।
भारत 12वें स्थान पर क्यों?
रिपोर्ट में यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि भारत वर्तमान में
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था,
चौथी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति,
और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है।
इसके बावजूद भारत को शीर्ष-10 में स्थान न मिलना कई विश्लेषकों को चौंका रहा है। रिपोर्ट का संकेत है कि भारत की आर्थिक और सैन्य ताकत के बावजूद, वैश्विक राजनीतिक प्रभाव, रणनीतिक गठबंधन और संस्थागत नेतृत्व के कुछ पैमानों पर वह अभी शीर्ष शक्तियों से पीछे है।
कौन करता है यह आकलन
रिपोर्ट में बताया गया है कि World Population Review यह रैंकिंग U.S. News & World Report, BAV Group और
Wharton School के सहयोग से जारी करता है।
इसके लिए दुनियाभर में व्यापक सर्वेक्षण किए जाते हैं, जिनमें आम नागरिकों, नीति-विशेषज्ञों और पेशेवर विश्लेषकों से निश्चित बिंदुओं पर प्रतिक्रियाएं ली जाती हैं।
शक्ति की परिभाषा: सिर्फ सेना नहीं
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि “शक्ति” को परिभाषित करना एक जटिल प्रक्रिया है। आज के दौर में शक्ति केवल हथियारों और सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि
वैश्विक आर्थिक नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में निर्णायक भूमिका
सांस्कृतिक और वैचारिक प्रभाव
दीर्घकालिक रणनीतिक नेतृत्व
जैसे तत्व भी उतने ही अहम माने जाते हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह रैंकिंग एक संकेत और चेतावनी दोनों है। आर्थिक और सैन्य दृष्टि से मजबूत होने के बावजूद, यदि भारत को शीर्ष वैश्विक शक्तियों की पंक्ति में स्थायी स्थान बनाना है, तो उसे कूटनीतिक प्रभाव, वैश्विक नेतृत्व और रणनीतिक गठबंधनों में और अधिक सक्रिय व निर्णायक भूमिका निभानी होगी।
यह रैंकिंग आने वाले वर्षों में भारत की विदेश नीति, रक्षा रणनीति और वैश्विक भूमिका को लेकर नई दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकती है।
