
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में कुछ अधिकारी ऐसे रहे हैं जिन्होंने बेहद कम समय में सत्ता, भरोसे और रसूख की ऊँचाइयाँ छुईं—और उतनी ही तेजी से विवादों के भंवर में फँस गए। Abhishek Prakash उन्हीं नामों में सबसे ऊपर गिने जा रहे हैं।
2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश, जिनका जन्म बिहार के सिवान जिले में 21 दिसंबर 1982 को हुआ, कभी यूपी मुख्यमंत्री कार्यालय के भरोसेमंद अफसर माने जाते थे। लखनऊ के जिलाधिकारी जैसे ताकतवर पद पर लंबा कार्यकाल, ‘इन्वेस्ट यूपी’ जैसे रणनीतिक विभाग की कमान—यह सब उनकी प्रशासनिक यात्रा के शिखर रहे। लेकिन अब वही नाम जनवरी 2026 में विशेष जांच दल (SIT) की चार्जशीट में आधिकारिक आरोपी के तौर पर दर्ज हो चुका है।
बिहार से IIT और फिर UPSC का शिखर
अभिषेक प्रकाश शुरू से ही मेधावी रहे। कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा पास कर उन्होंने IIT Roorkee से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक किया। इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा में 2005 में ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल कर उन्होंने प्रशासनिक सेवा में कदम रखा।
2006 में आईएएस बनने पर उन्हें नागालैंड कैडर मिला। शुरुआती वर्षों में उनकी छवि एक कर्मठ और अनुशासित अधिकारी की बनी।
प्यार, हाई-प्रोफाइल शादी और ‘पावर कपल’ की छवि
अभिषेक प्रकाश की निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। उनकी जान-पहचान 2009 बैच की आईएएस अधिकारी अदिति सिंह से हुई। दोस्ती प्यार में बदली और दोनों ने विवाह कर लिया।
स्पाउस ग्राउंड के आधार पर अभिषेक प्रकाश ने नागालैंड कैडर छोड़कर उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति कराई। एक दौर में यह दंपति यूपी ब्यूरोक्रेसी का ‘पावर कपल’ कहा जाने लगा।
वैवाहिक विवाद और कैडर ट्रांसफर की लंबी लड़ाई
समय के साथ रिश्तों में दरार आई। मामला इतना बढ़ा कि अदिति सिंह ने शासन से शिकायत कर अभिषेक को उनके मूल कैडर वापस भेजने की मांग की।
यूपी कैडर में स्थायी विलय को लेकर वर्षों तक कानूनी लड़ाई चली। व्यक्तिगत विवादों की खबरें मीडिया की सुर्खियाँ बनीं। अंततः दोनों का तलाक हो गया, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने अभिषेक प्रकाश की प्रशासनिक साख को गहरा आघात पहुँचाया।
‘इन्वेस्ट यूपी’ और कमीशन कांड
अभिषेक प्रकाश के करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वे Invest UP के सीईओ बनाए गए।
आरोप है कि उन्होंने एक बड़ी सोलर कंपनी SAEL Solar के प्रोजेक्ट को मंजूरी और सब्सिडी दिलाने के बदले अपने कथित खास बिचौलिए निकांत जैन के जरिए 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की।
शिकायतकर्ता ने ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजी सबूतों के साथ मामला सीधे मुख्यमंत्री तक पहुँचाया। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आए।
इसी आधार पर मार्च 2025 में योगी सरकार ने अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया।
जनवरी 2026: आरोपी घोषित, ED की एंट्री
नए साल की शुरुआत में मामला और गंभीर हो गया। SIT ने लगभग 1600 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर अभिषेक प्रकाश को औपचारिक रूप से आरोपी घोषित कर दिया।
इसके साथ ही Enforcement Directorate (ED) भी सक्रिय हो गई। जांच में लखनऊ से लेकर बरेली तक फैली जमीनों, बेनामी संपत्तियों और अवैध निवेशों के संकेत मिले हैं।
टॉपर से कटघरे तक
कभी आईएएस टॉपर्स को मोटिवेशनल लेक्चर देने वाले अभिषेक प्रकाश आज खुद अदालतों और वकीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
उनकी कहानी भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए एक सख्त चेतावनी मानी जा रही है कि प्रतिभा, पद और सत्ता अगर जवाबदेही से अलग हो जाएँ, तो पतन तय है।
(यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है; सभी आरोप जांच और अदालत के अंतिम निर्णय के अधीन हैं।)

