
इंदौर। चंदन नगर थाने की पुलिस ओर टीआई इंद्रमणि पटेल की मनमानी और एक इंजीनियर युवक को अवैध हिरासत में रखने के मामले पर हाईकोर्ट की कड़क टिप्पणी सामने आई। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी रियल एस्टेट कारोबारी के बेटे राजा को चंदन नगर पुलिस ने अनाधिकृत रूप से बंदी बनाकर करीब 30 घंटे तक थाने में बैठा कर रखा। उसके हाथों में हथकड़ी डाली गई और बिना अपराध, बिना एफआईआर, बिना गिरफ्तारी वारंट थाने में रोककर रखा गया।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इसे ‘मूलभूत अधिकारों का खुला उल्लंघन’ करार देते हुए पुलिस पर तीखी टिप्पणी की। अदालत में पेश वीडियो और पेन ड्राइव फुटेज में जब राजा के हाथों में हथकड़ी और 30 घंटे की होल्डिंग साफ दिखाई दी, तो जजों ने कठोर शब्दों में कहा ‘हथकड़ी लगा दी थी, बेड़ियां भी पहना देते … यह किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं।’ इस पूरे प्रकरण के खिलाफ राजा के परिवार ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की।
यह याचिका उसके साले आकाश तिवारी ने वकील नीरज सोनी की मदद से दाखिल की थी। इसमें पुलिस की अवैध हिरासत और मनमानी कार्रवाई का उल्लेख किया गया। हाई।कोर्ट ने चंदन नगर थाना प्रभारी टीआई इंद्रमणि पटेल और संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए और पुलिस कमिश्नर को दो हफ्तों में पूरी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

युवक का किसी अपराध से कोई वास्ता नही
युवक के परिवार ने आरोप लगाया कि चंदन नगर पुलिस ने उसे पिता की गिरफ्तारी के दबाव में एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। जबकि, युवक एक पढ़ा-लिखा इंजीनियर है और किसी भी अपराध से उसका कोई लेना-देना नहीं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आरोपी पिता फरार था, तो पुलिस ने उसकी जगह बेटे को निशाना क्यों बनाया, और किस अधिकार से उसे हथकड़ी पहनाई गई? हाईकोर्ट ने इन सभी पहलुओं पर कड़ी नाराजगी जताई है।
इस प्रकरण के सामने आते ही टीआई इंद्रमणि पटेल की पुरानी विवादित करतूतें भी चर्चाओं में लौट आई हैं। पहले भी पटेल पर मनमानी के कई आरोप लग चुके हैं। उन्होंने अनवर हुसैन नामक व्यक्ति के मामले में कोर्ट में फर्जी अपराधों की सूची पेश की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पटेल और एडिशनल डीसीपी को केस में पक्षकार बनाने के आदेश दिए थे। इससे पहले लसूड़िया थाने में पदस्थ रहते हुए भी पटेल का नाम कई विवादित कार्रवाइयों, मनमाने व्यवहार और दबाव में लिए गए निर्णयों में सामने आता रहा है। लेकिन, रसूख और संरक्षण के कारण उन पर कभी कोई कड़ी विभागीय कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस की शक्ति का सीधा दुरुपयोग
कानूनी जानकारों के अनुसार किसी भी नागरिक को बिना अपराध के थाने में बैठाना, वह भी हथकड़ी लगाकर, पुलिस की शक्ति का सीधा दुरुपयोग है। कानून में यह स्पष्ट है कि हथकड़ी केवल गंभीर अपराध या भागने की ठोस आशंका होने पर ही लगाई जा सकती है, जो इस केस में बिल्कुल नहीं था। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब इंदौर पुलिस पर भारी दबाव है कि वह अपने थाना प्रभारी और स्टाफ की इस हरकत पर पारदर्शी रिपोर्ट पेश करे। अदालत की सख्ती के बाद यह मामला सिर्फ एक थाने की मनमानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस प्रशासन की जवाबदेही और कानून के राज पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।