
वॉशिंगटन / काराकस। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म Truth Social पर एक तस्वीर साझा करते हुए स्वयं को वेनेज़ुएला का “कार्यवाहक राष्ट्रपति” बताया और दावा किया कि वेनेज़ुएला से पाँच करोड़ बैरल तेल अमेरिका की ओर भेजा जा रहा है, जिसकी अनुमानित क़ीमत 4.2 अरब डॉलर बताई जा रही है।
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के 45वें और 47वें राष्ट्रपति हैं और उन्होंने 20 जनवरी 2025 को पदभार ग्रहण किया था। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ पैदा कर दी हैं।
वेनेज़ुएला में सत्ता को लेकर विवाद
ट्रंप के इस दावे के बीच वास्तविकता यह है कि वेनेज़ुएला में औपचारिक रूप से अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में डेल्सी रोड्रिगेज़ ने हाल ही में शपथ ली है। यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ़्लोरेस को अमेरिकी कार्रवाई के बाद गिरफ़्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया।
अमेरिकी अदालत में पेशी के दौरान मादुरो ने स्वयं को “अपहृत राष्ट्रपति” बताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है। उन पर नार्को-टेरेरिज़्म की साज़िश से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
तेल सौदे और अमेरिकी नियंत्रण का दावा
रविवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला से भेजा जा रहा तेल “पहले ही रास्ते में है” और इसका प्रबंधन अमेरिकी प्रशासन के नियंत्रण में रहेगा। उन्होंने कहा
“अमेरिकी राष्ट्रपति होने के नाते यह धनराशि मेरे नियंत्रण में रहेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसका उपयोग वेनेज़ुएला और अमेरिकी जनता, दोनों के हित में हो।”
ट्रंप ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को इस योजना को तत्काल लागू करने का निर्देश देने की बात भी कही और स्पष्ट किया कि तेल को स्टोरेज शिप और अनलोडिंग डॉक के ज़रिए अमेरिका लाया जाएगा।
अमेरिकी हस्तक्षेप पर ट्रंप का तर्क
वेनेज़ुएला पर की गई अमेरिकी कार्रवाई का बचाव करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वहाँ की ज़िम्मेदारी तब तक संभालेगा,
“जब तक सत्ता का हस्तांतरण सुरक्षित, उचित और न्यायसंगत ढंग से नहीं हो जाता।”
उनका कहना था कि अमेरिका यह जोखिम नहीं उठा सकता कि वेनेज़ुएला की सत्ता ऐसे किसी व्यक्ति के हाथ में जाए, जो वहाँ के लोगों के हितों की रक्षा न कर सके।
तेल भंडार, संभावनाएँ और चुनौतियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार, वेनेज़ुएला के पास अनुमानित 303 अरब बैरल तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है। इसके बावजूद वर्ष 2000 के बाद से देश का तेल उत्पादन लगातार गिरता गया है।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी तेल कंपनियाँ वेनेज़ुएला के जर्जर ऑयल इंफ़्रास्ट्रक्चर को पुनर्जीवित कर सकती हैं। फिलहाल वहाँ केवल Chevron नामक एक अमेरिकी कंपनी सक्रिय है।
हालाँकि, ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने उत्पादन स्तर को बहाल करने में दसियों अरब डॉलर और कम से कम एक दशक का समय लग सकता है। इसके अलावा, वेनेज़ुएला का तेल हेवी क्रूड है, जिसे रिफ़ाइन करना महँगा और तकनीकी रूप से कठिन है।
वैश्विक राजनीति में नई अनिश्चितता
ट्रंप के बयानों और दावों ने न केवल अमेरिका–वेनेज़ुएला संबंधों को बल्कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून, संप्रभुता और ऊर्जा राजनीति से जुड़े कई सवालों को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शक्तियाँ इस घटनाक्रम पर क्या रुख़ अपनाती हैं।