
विक्रम सेन
वॉशिंगटन/ नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदल गए हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान को असैन्य ऊर्जा उत्पादन परमाणु कार्यक्रम के लिए 20 से 30 अरब अमेरिकी डॉलर की निवेश सहायता देने पर विचार कर रहा है। साथ ही तथा पश्चिम एशियाई देश को विदेशी बैंक खातों में जमा 6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच की अनुमति देना शामिल है, जिसका स्वतंत्र रूप से उपयोग करने पर उस पर प्रतिबंध है। जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में एक आश्चर्यजनक मोड़ आ गया है।
यह चर्चा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा मोड़ है, जो अमेरिका द्वारा तेहरान को शांति वार्ता के लिए मेज पर लाने का प्रयास प्रतीत होता है।
हालांकि वाशिंगटन का गैर-परक्राम्य सौदा तेहरान के इस निरंतर रुख के विपरीत है कि उसे ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए संवर्धन की आवश्यकता है।
सीएनएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले शुक्रवार को व्हाइट हाउस में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और खाड़ी साझेदारों के बीच घंटों चली गुप्त बैठक में इस संदर्भ में कुछ विवरण सामने आए। यह बैठक ईरान के तीन परमाणु स्थलों – इस्फ़हान, फ़ोर्डो और नतांज़ पर अमेरिका के सैन्य हमलों के एक दिन बाद हुई थी।
एक अमेरिकी अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि कार्यक्रम के वित्तपोषण के लिए धनराशि सीधे अमेरिका से नहीं आएगी, वह चाहते हैं कि इसका बिल अरब साझेदारों द्वारा चुकाया जाए।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री ने स्वीकार किया है कि हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए बम विस्फोटों में देश के परमाणु स्थलों को “अत्यधिक एवं गंभीर” क्षति हुई है।
अब्बास अराघची ने गुरुवार शाम को एक सरकारी प्रसारक को बताया कि ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन द्वारा क्षति का आकलन किया जा रहा है।
बता दे कि इस बयान के पहले, कुछ ही घंटे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा कि इन हमलों से देश के परमाणु कार्यक्रम में कोई बाधा नहीं आई है। खामेनेई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि बमों ने तीन परमाणु स्थलों को “पूरी तरह से नष्ट” कर दिया है।
खामेनेई ने कहा था कि अमेरिकी हमले “कुछ भी महत्वपूर्ण हासिल करने में विफल” रहे हैं।
लेकिन अराघची की टिप्पणी एक अलग प्रभाव पैदा करती है।
ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने की कोई योजना नहीं है। जब इजरायल ने हमले शुरू किए तो ईरान ने छठे दौर की वार्ता रद्द कर दी।
उन्होंने कहा, “मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहूंगा कि नई वार्ता शुरू करने के लिए कोई समझौता, व्यवस्था या बातचीत नहीं हुई है।”
उन्होंने कहा कि सरकार इस बात की जांच कर रही है कि “ईरानी लोगों के हित” में क्या है, तथा कूटनीति के प्रति उसका दृष्टिकोण “नया रूप” लेगा।
उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका आशय क्या था
विदित हो कि बुधवार को ही ईरान की संसद ने वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग बंद करने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी। अगर इसे लागू किया जाता है, तो इसका मतलब होगा कि ईरान अब अपने परमाणु स्थलों में परमाणु निरीक्षकों को आने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं है।
उधर इजराइल ने कहा है कि ईरान के खिलाफ उसका आक्रमण, उसके दावे के अनुसार, परमाणु हथियार विकसित करने की ईरान की योजना को विफल करने के लिए आवश्यक था।
पिछले सप्ताह अमेरिका सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल हो गया था, तथा उसने फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान में स्थित प्रतिष्ठानों पर हमला किया था, जिसके बाद ट्रम्प ने इजरायल और ईरान के बीच युद्ध विराम के लिए त्वरित मध्यस्थता की मांग की थी।
इस बीच इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज का बयान आया है।
इजराइल काट्ज ने मीडिया चैनलों को दिए साक्षात्कार में कहा कि सरकार ने बिना यह जाने कि अमेरिका इसमें शामिल होगा या नहीं, युद्ध शुरू कर दिया था।
इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि इजरायल को नहीं पता कि यूरेनियम का भंडार कहां है, लेकिन जरूरत पड़ी तो इजरायल दोबारा ईरान पर हमला करेगा। उन्होंने कहा, ‘हम ईरान को परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलों को विकसित करने की अनुमति नहीं देंगे।’
काट्ज ने यह भी स्वीकार किया कि इजरायल को ईरान के सभी एनरिच यूरेनियम का स्थान नहीं पता है, लेकिन दावा किया कि उनके सैन्य हमलों ने तेहरान की संवर्द्धन क्षमताओं को तबाह कर दिया है। काट्स ने खामेनेई के खात्मे को लेकर कहा, ‘अगर खामेनेई हमारी पहुंच में होते, तो हम उन्हें मार गिराते। हमने कोशिश तो पूरी की थी।’ काट्ज ने कहा, ‘इजरायल, खामेनेई को खत्म करना चाहता था, लेकिन ऐसा करने का कोई मौका नहीं मिला।’ काट्ज से जब पूछा गया कि क्या इजरायल ने अमेरिका से इसकी इजाजत मांगी थी, उन्होंने जवाब दिया, ‘हमें इन चीजों के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है।’