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इंदौर। खरगोन में पिछले दिनों आरआई (रक्षित निरीक्षक) और आरक्षक के बीच हुए विवाद के मामले में खरगोन जयस के जिला अध्यक्ष ने इंदौर हाई कोर्ट में अपील की थी। डबल बेंच में मामले की सुनवाई हुई, जिसमें न्यायमूर्ति ने जनहित याचिका (पीआईएल) को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह जनहित की नहीं निजी हित की याचिका है। याचिका लगाने वाले जिला अध्यक्ष पर हाई कोर्ट ने ₹100000 की कास्ट भी लगाई है।
खरगोन रक्षित निरीक्षक सौरभ सिंह कुशवाहा और आरक्षक राहुल चौहान के बीच हुआ विवाद पिछले दिनों बेहद सुर्खियों में रहा। इस विवाद को जनहित का बताते हुए खरगोन जिले के जयस जिला अध्यक्ष सचिन सिसोदिया की ओर से इंदौर हाई कोर्ट में एक पीआईएल लगाई गई थी।
हालांकि, इस पीआईएल से पहले खुद आरक्षक राहुल चौहान ने भी हाईकोर्ट की शरण ली। उन्होंने भी पीआईएल लगाई, जो खुद ही वापस भी ले ली थी। राहुल चौहान द्वारा पीआईएल वापस लेने के बाद जयस खरगोन के जिला अध्यक्ष सचिन सिसोदिया मामले को जनहित का बताते हुए हाईकोर्ट में लेकर आए थे।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति विनोद कुमार द्विवेदी की डबल बेंच में इस पीआईएल की सुनवाई हुई। जिसमें शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने तर्क रखे। याचिका लगाने वाले सचिन सिसोदिया और जयस द्वारा आरआई और आरक्षक के विवाद के बाद सोशल मीडिया पर शासन-प्रशासन के खिलाफ टिप्पणी की। आरक्षक राहुल चौहान द्वारा पीआईएल वापस लेने के बाद उसके खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी कर उसे जान से मारने की धमकी तक दी गई।
यह सभी तथ्य अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने न्यायमूर्ति के समक्ष रखे। लगभग 15 मिनट तक मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में हुई। सभी तर्क और पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्तियों ने माना कि जो पीआईएल जयस खरगोन के जिला अध्यक्ष द्वारा लगाई गई, वह जनहित की न होकर निजी हित की थी। नाराज होकर कोर्ट ने ₹100000 की कास्ट भी लगाई और एक माह में उक्त राशि जमा करने के आदेश दिए हैं।