
विक्रम सेन
नई दिल्ली । सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका की सुनवाई करने पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें भारत के चुनाव आयोग को नियंत्रण इकाई द्वारा इलेक्ट्रॉनिक गिनती के अलावा मतदाता सत्यापित पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) पर्चियों की 100% मैन्युअल गिनती के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ इस मुद्दे पर दिल्ली उच्च न्यायालय के 12 अगस्त, 2024 के फैसले के खिलाफ हंस राज जैन की याचिका पर विचार कर रही थी।
हंसराज जैन ने कहा था कि VVPAT की सभी पर्चियों को गिनने में कई दिन लगने का चुनाव आयोग का दावा गलत है. वह ऐसा तरीका बता सकते हैं जिससे 24 घंटे के भीतर सभी पर्चियों को गिना जा सकेगा, इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह की याचिका को पहले भी कई बार विस्तार से सुन कर फैसला दिया जा चुका है. एक ही विषय को बार-बार नहीं सुना जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट 2019 और 2024 में वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती बढ़ाने से लेकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने तक जैसी मांग करने वाली याचिकाओं को सुनकर फैसला दे चुका है. 2024 में दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि VVPAT की सभी पर्चियों को गिनने या बैलेट पेपर से चुनाव करने जैसी मांगें पूरी तरह से अव्यवहारिक हैं और इन पर विचार नहीं किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल करने वाले हंसराज जैन खुद पैरवी के लिए पेश हुए. मामला चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच में लगा था. हंसराज जैन ने कहा कि VVPAT की सभी पर्चियों को गिनने में कई दिन लगने का चुनाव आयोग का दावा गलत है. वह ऐसा तरीका बता सकते हैं जिससे 24 घंटे के भीतर सभी पर्चियों को गिना जा सकेगा, लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि एक ही विषय को बार-बार नहीं सुना जा सकता.
ध्यान रहे कि 26 अप्रैल 2024 को दिए विस्तृत फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट की सभी पर्चियों को गिनने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई थी. कोर्ट ने तब याचिकाकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा था कि पूरी चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठा कर लोगों के मन में संदेह पैदा करना गलत है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए यहां बैलेट पेपर से चुनाव सही नहीं होगा.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से विपक्षी दलों के ईवीएम-वीवीपैट विरोध अभियान का समापन हो गया है।