
मॉस्को। रूस और अमेरिका के बीच यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयास एक बार फिर गतिरोध में फंस गए हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ एवं जारेड कुश्नर के बीच मंगलवार को लगभग 5 घंटे (300 मिनट) की लंबी बैठक हुई, लेकिन अपेक्षित प्रगति के बिना समाप्त हो गई। बातचीत का मुख्य केंद्र अमेरिका की शांति योजना थी, लेकिन यूक्रेन के विवादित इलाकों पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
रूस के वरिष्ठ सलाहकार यूरी उशाकोव के अनुसार, “बातचीत उपयोगी और रचनात्मक रही, लेकिन अभी भी काफी काम बाकी है। फिलहाल ऐसा कोई संयुक्त प्रस्ताव नहीं बन पाया है जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें।” इस असफलता के बाद पुतिन और ट्रंप के बीच संभावित आमने-सामने की बैठक की तैयारी भी आगे नहीं बढ़ सकी।
यूरोप को पुतिन की चेतावनी “युद्ध शुरू किया तो हार ऐसी होगी कि संधि करने वाला भी कोई नहीं बचेगा”
बैठक से ठीक पहले पुतिन ने यूरोपीय देशों को बेहद सख्त संदेश जारी किया।
पूर्वी यूक्रेन के शहर पोकरोव्स्क पर रूसी कब्जे को “विशेष सैन्य अभियान के शुरुआती लक्ष्यों की बड़ी सफलता” बताते हुए पुतिन ने कहा “हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि यूरोप युद्ध चाहता है और शुरू करता है, तो रूस तैयार है। यूरोप की हार इतनी पक्की और मुकम्मल होगी कि शांति समझौते के लिए भी कोई नहीं बचेगा।”
पुतिन ने यूरोपीय ताकतों पर शांति प्रयासों को विफल करने का आरोप लगाया और कहा कि “यूरोप के पास शांति का एजेंडा नहीं है, वह सिर्फ टकराव और युद्ध की नीति पर चल रहा है।”
यूक्रेन को सीधी धमकी बंदरगाहों और जहाज़ों पर हमले तेज होंगे
रूस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन के नेतृत्व पर “जमीनी स्थिति से कटे होने” और “घोटालों में उलझे रहने” की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन द्वारा रूस की ‘शैडो फ्लीट’ पर हमलों के जवाब में रूस बंदरगाहों और जहाज़ों पर हमले बढ़ाएगा।
‘ट्रंप की डील’ भी न काम आई, विटकॉफ और कुश्नर खाली हाथ लौटे
यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रयासों का हिस्सा थी। विटकॉफ और कुश्नर दोनों रूस यूक्रेन संघर्ष के समाधान की डील पर बातचीत करने मॉस्को पहुंचे थे।
लेकिन लंबी चली बैठक के बाद वे अमेरिकी दूतावास लौट गए, बिना किसी आधिकारिक घोषणा के जो वार्ता की असफलता को और स्पष्ट करता है।
भारत यात्रा से पहले पुतिन की यह कूटनीतिक आक्रामकता बेहद महत्वपूर्ण
राष्ट्रपति पुतिन 4 दिसंबर को भारत दौरे पर आने वाले हैं, और इससे पहले उनकी ओर से यूरोप और यूक्रेन को जारी की गई यह खुली चेतावनी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बड़ा संकेत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार पुतिन शांति वार्ता के बहाने रूस के कब्जे वाले इलाकों को कानूनी मान्यता दिलवाना चाहते हैं, जबकि अमेरिका और यूरोप इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं।
इसी विरोधाभासी स्थिति ने एक बार फिर बातचीत को ठहराव पर ला दिया है।
• युद्ध रोकने के प्रयास जारी हैं, लेकिन यूक्रेन की सीमा और कब्जे वाले क्षेत्रों पर समझौता सबसे बड़ा अवरोध बना हुआ है।
• पुतिन के आक्रामक बयान और यूरोप के साथ बढ़ते तनाव यह संकेत देते हैं कि आने वाले सप्ताह कूटनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।