
इंदौर। अपराधों पर नियंत्रण के साथ क्राइम ब्रांच की टीम साइबर फ्राड मामले में भी गंभीरता से काम कर रही है। टीम को जनवरी 2025 से 30 नवंबर तक आई 4500 शिकायतें मिली थी। यह शिकायतें थानों में संचालित हेल्प डेस्क, साइबर सेल, एनसीआरपी, हेल्पलाइन नंबर 1930, क्राइम ब्रांच में दर्ज हुई थी।
सभी शिकायतों पर पुलिस ने सूक्ष्म जांच कर ठगों के खाते फ्रीज कराए। इसके बाद पीड़ितों को उनकी राशि लौटाई। 11 माह में पुलिस के प्रयासों से 14 करोड़ 33 लाख 57 हजार, 247 रुपए रिफंड हो सके। कार्रवाई के दौरान पुलिस की जांच टीमों ने हजारों फर्जी बैंक खातों को फ्रीज कराया। 250 से अधिक हैक हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट रिकवर करवाए तथा 300 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, जो आवेदकों के नाम और फोटो से बनाए गए थे, उन्हें ब्लॉक करवाया। पुलिस के अनुसार, जनवरी में 70,32,307 रुपए, फरवरी में 81,95,694 रुपए, मार्च में 60,10,955 रुपए, अप्रैल में 61,54,890 रुपए, मई में 1,73,04,552 रुपए, जून में 1,86,62,205 रुपए, जुलाई में 1,78,82,194 रुपए, अगस्त में 1,49,71,122 रुपए, सितंबर में 1,68,10,000 रुपए, अक्टूबर में 1,30,94,421 तथा नवम्बर में 1,72,38,907 रुपए वापस कराए।
सबसे अधिक शिकायतें ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड (टास्क, ट्रेडिंग, गेमिंग आदि), बैंक अधिकारी बनकर केवायसी अपडेट, रिवॉर्ड प्वाइंट रिडेम्पशन, क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर धोखाधड़ी, डेंटिंग-मेट्रिमोनियल साइट्स के माध्यम से की जाने वाली ऑनलाइन ठगी शामिल है। 1000 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज किए गए, लेकिन इनमें खाताधारक व खाता बेचने वाले तक का पता नहीं चला। 250 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट हैक किए। क्राइम ब्रांच ने पीड़ितों के खाते तो रिकवर करवा दिए, लेकिन मुख्य हैकर को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। 300 से ज्यादा फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक, लेकिन ब्लॉक करने वाले 10% ही हिरासत में आए।
ठगी राशि का आंकड़ा जारी नहीं
2025 के 11 महीनों में साइबर फ्रॉड की 4500 शिकायत के बारे में क्राइम ब्रांच का दावा है कि उसने 14 करोड़ से अधिक की राशि शिकायतकर्ताओं को वापस करवाई। लेकिन, ठगी गई राशि कितनी थी, इसका आंकड़ा जारी नहीं किया। क्योंकि, ठगी राशि रिकवर की गई राशि से 3 से 4 गुना ज्यादा होने का अंदेशा है। जिन शिकायतों में ठगी गई राशि को फ्रीज करवाया गया, उनमें 80% मामलों में न तो जांच पूरी हुई, न गिरोह के मुख्य सरगना तक टीम पहुंची।
राशि का 40% भी वापस नहीं
क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को 11 महीनों के आंकड़े जारी करते हुए बताया कि 4500 से ज्यादा साइबर मामलों में हजारों बैंक खाते फ्रीज करवाने के साथ 14 करोड़ 33 लाख रुपए शिकायतकर्ताओं को वापस करवाए। पर, ये खुलासा नहीं किया कि वास्तव में कितनी राशि की साइबर ठगी हुई। माना जा रहा है कि यह राशि 60 करोड़ से ज्यादा होगी। कई पीड़ितों को ठगी राशि का 40% भी वापस नहीं मिला।
फ्रॉड का मुख्य सरगना फरार
क्राइम ब्रांच केवल देश में सक्रिय एजेंट, सिम खरीदने बेचने वाले, खाते खरीदने-बेचने वाले, खाताधारक और युवाओं को कमीशन देकर गैंग से जोड़ने वाले एजेंट तक ही पहुंच सकी। बड़े साइबर फ्रॉड के मुख्य सरगना जो म्यांमार, थाईलैंड, दुबई, लाओस और कंबोडिया से साइबर ठगी की गैंग चला रहे हैं, उन तक पुलिस नहीं पहुंच सकी। कई मामलों में चालान भी पेश नहीं किए गए। देश के बाहर बैठे ठगों की न तो गिरफ्तारी हो सकी न रिकवरी। कई अपराधों में मुख्य सरगना फरार ही हैं।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया के मुताबिक, साइबर ठगी की विभिन्न प्लेटफार्मों पर शिकायतें आई है। अधिकांश का निराकरण कर पीड़ितों को उनकी राशि रिफंड कराई गई है। बचे हुए पीड़ितों के पैसे दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
