
नई दिल्ली। अचानक संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायदान भारत पहुंचे। वे 2 घंटे के लिए नई दिल्ली आए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। जायदान के इस दौरे को यूएई के हालिया संकट से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले एक महीने के घटनाक्रम को देखा जाए तो खाड़ी में अबु धाबी बुरी तरह फंस चुका है। एक तरफ जहां मिडिल ईस्ट के 3 देशों से उसे झटका मिला। वहीं पड़ोसी सऊदी का कद लगातार खाड़ी में बढ़ रहा है। पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के साथ मिलकर सऊदी एक मजबूत सैन्य गठबंधन बनाने जा रहा है। इसे यूएई के लिए ही बड़ा खतरा बताया जा रहा है।
भारत क्यों आए मोहम्मद जायदान
संयुक्त अरब अमीरात खाड़ी में भारत का सबसे बढ़िया दोस्त है। दोनों के बीच साल 2024-25 में व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सऊदी की तुलना में यह 60 अरब डॉलर ज्यादा है। दूसरी ओर सऊदी पाकिस्तान के साथ गठबंधन कर रहा है। पाकिस्तान और भारत के बीच दक्षिण एशिया में 36 के आंकड़े हैं। जानकारों का कहना है कि यूएई की पहली कोशिश भारत का विश्वास हासिल करना है।
यूएई के थिंक प्लस से जुड़े अहमद अल-शाही का कहना है कि जायदान की नजर भारत से दीर्घकालिक समझौते पर है। जायदान चाहते हैं कि भारत के साथ जो संबंध हैं, वो सिर्फ अल्पकालिक न रहे। अमेरिका ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगा दिया। भारत और यूएई दोनों ईरान से ट्रेड डील करता रहा है। मोदी और जायदान की बैठक में इसका हल निकालने का प्रयास किया जा सकता है।
अचानक संकट में फंसा संयुक्त अरब अमीरात
2025 के अंत संयुक्त अरब अमीरात बुरी तरह फंस गया है। एक तरफ उसे यमन से बाहर निकलना पड़ा, दूसरी तरफ सोमालिया से भी अमीरात को झटका लगा। सूडान में भी यूएई पर नरसंहार कराने का आरोप लगा। इसको लेकर यूएई के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट में मुकदमा भी दाखिल किया गया।
(1) यमन के दक्षिण भाग पर एसटीपी के जरिए यूएई ने कब्जा जमा लिया था। लेकिन, सऊदी अरब ने यूएई के जहाज को इस इलाके में बम से उड़ा दिया। इसके बाद यूएई को पीछे हटना पड़ गया। सऊदी ने दक्षिणी भाग को अपने कंट्रोल में ले लिया है। एसटीपी के नेता को देश छोड़कर भागना पड़ गया।
(2) सोमालिया ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ सभी समझौते रद्द कर दिए। यह फैसला यूएई के इजराइल से नजदीक होने की वजह से सोमालिया ने लिया है। इसे संयुक्त अरब अमीरात के लिए इसलिए भी झटका माना जा रहा है। क्योंकि, सोमालिया हॉर्न ऑफ अफ्रीका पर स्थित है।
(3) सऊदी अरब का लगातार दबदबा बढ़ता जा रहा है। सऊदी ने एक तरफ जहां सना छोड़कर पूरे यमन पर अपना कंट्रोल कर लिया। वहीं सोमालिया से उसके संबंध प्रगाढ़ हुए। सूडान में भी सऊदी अपना दबदबा बढ़ा रहा है। लीबिया में भी सऊदी ने पाकिस्तान के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की। सऊदी तुर्की और पाकिस्तान के साथ मिलकर एक सैन्य संगठन बनाने की दिशा में है।