
धराली। बीते बरस 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली में आए जलप्रलय की वजह क्या थी? इस पर वैज्ञानिकों के अलग-अलग मत है। लेकिन, अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) की सैटेलाइट एनलिसिस ने इस जलप्रलय का कारण बताया। इसरो की रिपोर्ट में बताया गया है कि धराली आपदा की वजह बर्फ के विशाल टुकड़े ग्लेशियर के नीचे खिसकने से हुई थी।
5 अगस्त को धराली में पहाड़ से मौत का सैलाब आया था। इस आपदा में लगभग 68 लोगों की मौत हुई थी। पूरा धराली कस्बा मलबे में जमीदोंज हो गया। मंदिर, दुकान, बाजार सब हजारों टन मलबे में दब गए थे। अब इसरो ने सेटेलाइट तस्वीरों की नई रिसर्च में न सिर्फ इस बात को दोहराया कि धराली आपदा बर्फ के बड़े टुकड़े के ग्लेशियर से नीचे खिसकने से हुई, बल्कि उसका आकार-प्रकार भी साफ किया है।
बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से आपदा आई
इस आपदा ने न सिर्फ धराली और हर्षिल में भारी तबाही मचाई, बल्कि पूरी भागीरथी घाटी में तबाही हुई थी। उस समय जो कारण बताए गए, वह ठीक इसके उलट है। उस समय बताया जा रहा था क्लाउडबर्स्ट यानी बादल फटने, भारी बारिश या ग्लेशियर झील का कोई रोल नहीं था। बल्कि, श्रीकंठ ग्लेशियर का एक बड़ा बर्फ का हिस्सा गिरने से धराली आपदा आई थी।
धराली आपदा की असल वजह
इसरो के वैज्ञानिक शोधकर्ताओं गिरिबाबू दंडबथुला, ओमकार शशिकांत घटगे, शुभम रॉय, अपूर्व कुमार बेरा और सुशील कुमार श्रीवास्तव ने अपनी अपनी जांच में नया निष्कर्ष निकाला। उन्होंने बताया कि यह आपदा न बादल फटने से हुई थी और न ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड से। बल्कि, धराली के करीब 10 किलोमीटर ऊपर श्रीकंठ ग्लेशियर क्षेत्र में मौजूद एक विशाल आइस-पैच के अचानक ढहने से यह तबाही आई।
69 लाख किलो बर्फ गिरा
रिसर्च में बताया गया है कि ग्लेशियर से 0.25 वर्ग किमी क्षेत्र करीब 75 हजार घन मीटर बर्फ और मलबा 1.7 किलोमीटर नीचे टूटकर गिरा। यानी 69 लाख किलो बर्फ नीचे ढलान की तरफ गिरी और तेज घर्षण के साथ वह पानी में तब्दील होती चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक ऊपर से नीचे गिरने के कारण स्पीड इतनी थी कि खीर गंगा के कैचमेंट एरिया में मौजूद भारी मलबा तेजी से धराली की तरफ आया, जिसने भारी तबाही मची।