
इंदौर। लगातार बढ़ रहे यात्रियों और उड़ानों के दबाव को देखते हुए एयरपोर्ट प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर मौजूदा टर्मिनल पर बढ़ते लोड को कम करने के लिए अब पुराने टर्मिनल को दोबारा संचालित करने की योजना बनाई गई है।
एयरपोर्ट प्रबंधन का उद्देश्य व्यस्त समय में लगने वाली लंबी कतारों, चेक-इन काउंटर पर भीड़ और सुरक्षा जांच में आने वाली देरी को नियंत्रित करना है। पुराने टर्मिनल के उपयोग से यात्रियों की एंट्री-एग्जिट प्रक्रिया तेज होगी और अलग-अलग समय पर आने-जाने वाली उड़ानों का बेहतर वितरण संभव हो सकेगा। एक अप्रैल से इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि संचालन प्रभावित न हो और यात्रियों को असुविधा भी न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि टर्मिनल क्षमता बढ़ाना केवल भवन विस्तार नहीं, बल्कि यात्री प्रवाह, सुरक्षा जांच, बोर्डिंग गेट और बैगेज मूवमेंट का संतुलित प्रबंधन भी है।
पुराने टर्मिनल का सुधार
एयरपोर्ट पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुराने टर्मिनल से उड़ानों का संचालन करने के लिए सुधार कार्य आरंभ किया गया था। इस कार्य का सिविल वर्क पूरा हो चुका है, अब आंतरिक रिनोवेशन किया जा रहा है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने अप्रैल माह से संचालन शुरू करने के लिए आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इसमें इमिग्रेशन, अग्नि सुरक्षा और अन्य अनुमतियों की प्रक्रिया शामिल है। संभावना है कि उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू इसका लोकार्पण करेंगे।
बीते वर्षों में इंदौर एयरपोर्ट पर यात्री संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज हुई है। ऐसे में पूरक टर्मिनल सुविधा संचालन की स्थिरता के लिए आवश्यक मानी जा रही है। पुराने टर्मिनल की वापसी को भविष्य की मांग के अनुरूप त्वरित और व्यावहारिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सुविधा और क्षमता दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके।