
इंदौर। शहर के व्यस्त रास्तों को बाधा मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने एक बार फिर कमर कस ली है। सड़कों के किनारे अवैध कब्जों और यातायात में रुकावट पैदा करने वाली चीजों को हटाने के लिए जल्द ही एक बड़ा साझा ऑपरेशन शुरू होगा।
पार्किंग का होगा शत-प्रतिशत इस्तेमाल
प्रशासन का मुख्य फोकस इस बात पर है कि शहर में मौजूद पार्किंग स्पेस खाली न रहें। अक्सर देखा जाता है कि पार्किंग स्थल होने के बावजूद लोग गाड़ियाँ बाहर खड़ी कर देते हैं, जिससे जाम लगता है।
– अब सरकारी और निजी पार्किंग स्थलों की पूरी क्षमता का उपयोग अनिवार्य होगा।
– जगह-जगह साइन बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि लोगों को पार्किंग ढूंढने में आसानी हो।
– पार्किंग सुविधा होने के बाद भी सड़क पर वाहन खड़ा करने वालों पर कड़ा जुर्माना किया जाएगा।
इन 7 चौराहों की बदलेगी सूरत
कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई ‘जिला सड़क सुरक्षा समिति’ की बैठक में शहर के 7 प्रमुख जंक्शन्स को मॉडल चौराहे के रूप में विकसित करने का फैसला लिया गया है। इन चौराहों पर तकनीकी सुधार और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में बदलाव किए जाएंगे।
(1) टावर चौराहा
(2) नवलखा
(3) महू नाका
(4) अग्रसेन चौराहा
(5) कालानी नगर
(6) पलासिया
(7) गीता भवन
खास निर्देश : सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग और लेन मार्किंग स्पष्ट की जाएगी। साथ ही, अब बिना अनुमति के मनमाने ढंग से स्पीड ब्रेकर बनाने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
राजवाड़ा में भारी वाहनों पर ‘नो-एंट्री’ की तैयारी
राजवाड़ा जैसे घनी आबादी वाले और व्यापारिक क्षेत्र की पतली गलियों में ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया जा सकता है। यहाँ बसों, चार पहिया गाड़ियों और ऑटो रिक्शा के प्रवेश को सीमित या प्रतिबंधित करने पर मंथन किया गया है।
ई-रिक्शा के लिए ‘कलर कोड’ सिस्टम
शहर में ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए इन्हें 7 अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है। अब तक 3,200 ई-रिक्शा चालकों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया है। हर सेक्टर के लिए एक खास कलर कोडिंग और स्टिकर निर्धारित होगा, जिससे पहचान आसान हो सके कि कौन सा रिक्शा किस रूट का है।