

धार। पर्यटन नगरी मांडू अब केवल इतिहास और प्राकृतिक सौदर्य के लिए ही नहीं, हाई-एंड टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में भी अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए मांडू में बड़े होटल ग्रुप्स का निवेश तेजी बढ़ता दिखाई दे रहा। कुछ परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं, जबकि कई नए प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन चयन कर प्रस्ताव शासन को भेजने की तैयारी चल रही है। इन होटलों के शुरू होने के बाद मांडू में वीआईपी लेवल की हॉस्पिटैलिटी साकार होगी।
मांडू अब केवल ‘देखने की जगह नहीं, बल्कि रुकने, वहां वक़्त बिताने और अनुभव करने की डेस्टिनेशन बनने की राह पर है। यदि योजनाएं समय पर और संतुलित तरीके से लागू हुई, तो आने वाले सालों में मांडू मध्य प्रदेश के प्रीमियम पर्यटन स्थलों में शुमार हो जाएगा।
केंद्रीय बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों के मंदिरों व तीर्थ स्थलों की आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना है। इस पहल से ऐसे कई स्थल लाभान्वित होंगे, जिनका धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व तो है, लेकिन प्रचार और सुविधाओं के अभाव में वे बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में उभर नहीं पाए हैं। मालवा और निमाड़ अंचल में भी ऐसे कई स्थल हैं, जिनके विकास से न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि रोजगार और व्यवसाय के अवसर भी बढ़ेंगे।
मांडू में लगेंगे विकास के पंख
मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से कलेक्टर को अवगत कराया गया कि धार जिले की ऐतिहासिक नगरी मांडू को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना है। यहां लगभग 24 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य किए जाएंगे। निविदा प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है एवं एजेंसी का चयन भी कर लिया गया है, जो शीघ्र ही कार्य प्रारंभ करेगी। इस परियोजना के अंतर्गत मांडू के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों राम मंदिर, जामा मस्जिद, अशर्फी महल, होशंगशाह का मकबरा, रैवा कुंड, छप्पन महल, दाई का महल, जाली महल तथा दरवाजों की श्रृंखला को समग्र रूप से जोड़ा गया है।
बहुत कुछ बदलने के आसार
साथ ही आकर्षक गार्डन, बैठने की व्यवस्था, रोशनी एवं सजावट, माइनर मॉन्यूमेंट ब्यूटीफिकेशन छोटे स्मारकों एवं सड़कों का सौंदर्यीकरण, ग्रीन टूरिज्म इनिशिएटिव, हर्बल गार्डन, लैंडस्केपिंग एवं सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटलीकरण एवं प्रशिक्षण पर फोकस, ऑडियो गाइड, मोबाइल ऐप एवं वेबसाइट, वेब-आधारित एआर कंटेंट, स्थानीय युवाओं के लिए स्किलिंग एवं ट्रेनिंग कार्यक्रम शामिल है।
यह बैठक कलेक्टर प्रियंक मिश्रा द्वारा ली गई, जिसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक चौधरी, डीएफओ विजयनंथम टीआर उपस्थित रहे। जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के नोडल अधिकार प्रवीण शर्मा एवं सदस्य भी बैठक में मौजूद रहे। जबकि मप्र टूरिज्म बोर्ड के अधिकारी ऑनलाइन सम्मिलित हुए।
रात में सूना रहता मांडू, अब रोशन होगा
फिलहाल मांडू में उच्चस्तरीय ठहराव सुविधाओं के अभाव में अधिकांश पर्यटक दिन में भ्रमण कर शाम होते-होते लौट जाते हैं। विशिष्ट अतिथियों, कलाकारों और फिल्म यूनिट्स के ठहरने के लिए मांडू में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। फिल्म शूटिंग के दौरान कलाकारों को इंदौर या महेश्वर में ठहराना पड़ता है। रात के समय बाजार और पर्यटन क्षेत्र में चहल-पहल कम रहती है। नई होटल परियोजनाओं के शुरू होने के बाद मांडू में नाइट टूरिज्म और लॉन्ग स्टे कल्चर को बढ़ावा मिलेगा।
हर साल 4 लाख सैलानी, क्षमता से ज्यादा मांग
मांडू अपनी हरियाली, मौसम और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण सालभर पर्यटकों को आकर्षित करता है। वर्षा ऋतु में पहाडियों की हरियाली व सर्दियों में सुहावना मौसम, हर साल 4 लाख से अधिक पर्यटक मांडू पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वहराव सुविधाएं बढ़ने से यह संख्या आने वाले वर्षों में दोगुनी हो सकती है। लेकिन, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन, अतिक्रमण नियंत्रण और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण भी उतना ही जरूरी होगा।
होटल इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव
पर्यटन विभाग के माध्यम से ऑरेंज काउंटी, आईटीसी और इंदौर के कुछ बड़े ग्रुप मांडू में होटल निर्माण करा रहे है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर कलर्स ग्रुप और जी-ग्रुप ने भी होटल इंडस्ट्री में निवेश करने की इच्छा जताई है।
यहां आकार ले रही बड़ी होटल परियोजनाएं
– झाबुरी क्षेत्र : ऑरेंज काउंटी द्वारा करीब 200 कमरों की वीआईपी होटल का निर्माण किया जा रहा है।
– सराय स्थित किला : आईटीसी भोपाल द्वारा किले को लीज पर लेकर उसके समीप 90 कमरों की होटल विकसित की जा रही है, जो तीन से चार माह में पूरी होने की संभावना है।
– बड़े गुप्स : इनकी मौजूदगी से मांडू में न केवल होटल व्यवसाय को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सुविधाओं का स्तर भी ऊंचा होग।
प्रस्तावित तीन होटल परियोजनाएं काकड़ा खो, सुलीबयड़ी और मीरा की जिरात में विकसित की जाएगी। जिला प्रशासन की भूमि चयन की प्रक्रिया जारी है। शासन की स्वीकृति के बाद यहां फोर और फाइव स्टार कैटेगरी की होटलें विकसित होंगी।
स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, व्यापार के नए अवसर
बड़े होटल गुप्स के आने से स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार, टैक्सी, गाइड, हस्तशिल्प, फूड और लोकल टूरिज्म को अप्रत्यक्ष लाभ, छोटे होटल, होम-स्टे और रेस्टोरेंट्स को व्यवसायिक मजबूती मिलेगी। इससे मांडू की अर्थव्यवस्था को नया संबल मिलेगा।
