
नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गणतंत्र दिवस समारोह में विपक्ष के नेताओं के बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट रैंक होने के बावजूद उन्हें और राहुल गांधी को तीसरी लाइन में बैठाया गया। खरगे ने केंद्र सरकार की इस हरकत को संविधान और विपक्ष का अपमान बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
प्रोटोकॉल नियमों की अनदेखी की
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान बैठने की व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में विपक्ष के नेताओं का अपमान किया गया। खरगे के अनुसार, सरकार ने जानबूझकर प्रोटोकॉल के नियमों की अनदेखी की और विपक्षी नेताओं को वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार हैं।
विपक्ष के नेताओं को अपमानित किया
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वह देश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उनके और राहुल गांधी के पास कैबिनेट मंत्री का दर्जा है। प्रोटोकॉल के हिसाब से कैबिनेट रैंक वाले नेताओं को पहली कतार में जगह मिलनी चाहिए। इसके बावजूद, उन्हें समारोह में तीसरी लाइन में बैठाया गया। खरगे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस लाइन में उन्हें जगह दी गई, वहां राज्य मंत्री और बच्चे बैठे थे।
कार्यक्रम का पास मिलने में भी परेशानी हुई
कांग्रेस अध्यक्ष ने पास मिलने में हुई परेशानियों का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने सचिवों को भेजकर बैठने की जगह की जानकारी जुटानी पड़ी। उन्हीं सचिवों ने काफी कोशिशों के बाद पास का इंतजाम किया। खरगे ने सरकार के इस व्यवहार को सिर्फ कांग्रेस का नहीं, बल्कि देश के संविधान और पूरे विपक्ष का अपमान बताया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह इस अपमानजनक व्यवहार पर स्पष्ट जवाब दे।
क्या कहता है प्रोटोकॉल
सरकारी कार्यक्रमों में बैठने की व्यवस्था राष्ट्रपति सचिवालय की तरफ से जारी ‘टेबल ऑफ प्रेसीडेंस’ के अनुसार होती है। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, पूर्व राष्ट्रपति, उप प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री के बाद नेता प्रतिपक्ष 7वें स्थान पर आते हैं। केंद्र की तरफ से औपचारिक जवाब भले न आया हो, लेकिन बीजेपी का दावा है कि पूरी व्यवस्था नियमों के तहत ही की गई थी।
