
इंदौर। मेट्रो स्टेशन के लिए 250 हरे भरे पेड़ों को काटने की योजना के खिलाफ धरना प्रदर्शन दो सप्ताह बादभी जारी है। कार्यकर्ता स्टेशन शिफ्ट करने की जिद पर अड़े हैं।
इंदौर की ऐतिहासिक पहचान और हरियाली के केंद्र रानी सराय को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने मोर्चा खोल दिया। अंडर ग्राउंड मेट्रो स्टेशन निर्माण के चलते सैकड़ों पुराने पेड़ों को काटे जाने के विरोध में इन लोगों ने परिसर को ही अपना घर बना लिया और डटे हुए हैं।
इस विरोध की आवाज बनी ‘जनहित पार्टी’ ने परिसर के 225 पेड़ों का पंचनामा तैयार किया, जिसमें पेड़ों की प्रजाति, लंबाई और चौड़ाई का पूरा विवरण दर्ज किया गया है। इसके बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संभाग आयुक्त और इंदौर सांसद शंकर लालवानी के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मेट्रो स्टेशन को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग की गई।
रीगल चौराहे पर पोस्टर और बैनर के माध्यम से आम जनता को इस योजना के प्रति जागरूक किया गया। जनहित पार्टी के पदाधिकारियों का दावा है कि अभी तक नगर निगम से मेट्रो बनाने वाली कंपनी को पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिली, बावजूद इसके कंस्ट्रक्शन कंपनी ने बडे़ बड़े शेड्स से पूरे इलाके को कवर कर दिया और काम शुरू कर दिया है।
परिसर में ही ‘रसोई और रैनबसेरा’
पहली जनवरी से शुरू हुआ यह अनिश्चितकालीन धरना अब दो हफ्ते बाद भी जारी है। कार्यकर्ता परिसर में ही भोजन पका रहे हैं और रात्रि विश्राम भी पेड़ों की छांव में ही कर रहे हैं। उनकी स्पष्ट मांग है कि विकास जरूरी है, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं। रीगल इलाके के पेड़ों की बलि रोकने के लिए सत्याग्रह जारी है। कभी 30% हरियाली वाला यह शहर आज महज 9% वन क्षेत्र पर टिका है।
गर्मी में ठंडी रातों के लिए प्रसिद्ध इंदौर अब एसी और कूलर के भरोसे सोने को मजबूर है। रानी सराय के ये पेड़ हजारों पक्षियों का घर हैं। इन्हें काटने से शहर का ईको-सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। पार्टी का सुझाव है कि तकनीकी रूप से स्टेशन की डिजाइन में बदलाव कर या इसे कुछ मीटर दूर शिफ्ट कर इन पेड़ों को बचाया जा सकता है।
