
भोपाल। अपने खुशबू और शानदार स्वाद के लिए रीवा का सुंदरजा आम मध्य प्रदेश की पहचान बन चुका है। इसी तरह रतलाम में पैदा होने वाला रियावन लहसुन अपनी अनोखी विशेषता और बंपर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यह दोनों ही फसलों को जीआई टैग मिल चुका है।
अब राज्य सरकार 15 अलग-अलग उद्यानिकी उत्पादों को ‘जीआई टैग’ दिलाने की कोशिश में जुट गया है। जीआई टैग मिलने से मध्य प्रदेश की इन फसलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। इसका सीधा फायदा स्थानीय किसानों को होगा।
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा कहते हैं कि प्रदेश की उद्यानिकी फसलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रदेश की अलग-अलग खास फसलों को जीआई टैग दिलाने की कार्रवाई की जा रही है। इसका कितना अच्छा फायदा मिलता है। यह प्रदेश के सुंदरजा आम और रियावन लहसुन से समझा जा सकता है।


सुंदरजा आम का रीवा में 450 हेक्टेयर रकबे में खेती हो रही है। जबकि रियावन लहसुन की खेती 2 हजार हेक्टेयर पर खेती हो रही है। दोनों ही फसलों को 2024 को जीआई टैग मिला है। इसके बाद राज्य शासन 15 अलग-अलग फसलों को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया में जुट गई है।
इन फसलों को मिलेगा जीआई टैग
मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में खरगोन इलाके की लाल मिर्च की अपनी अलग पहचान है। इस मिर्च का इस क्षेत्र में जबरदस्त उत्पादन होता है। लाल मिर्च खरगोन की पहचान बन गई है। इसी तरह जबलपुर की मटर विदेशी तक अपने स्वाद से लोगों को लुभा रही है। इन दोनों ही फसलों को जल्द ही जीआई टैग मिलने जा रहा है।
सिवनी के सीताफल को भी टैग मिलेगा
वहीं बुरहानपुर के केला, सिवनी के सीताफल को भी जीआई टैग मिलेगा। नरसिंहपुर के बरमान का बैंगन, बैतूल के गाजरिया आम को भी जीआई टैग दिलाया जाएगा। इंदौर के मालवी आलू प्रसिद्ध है। यहां पैदा होने वाले आलू का उपयोग चिप्स बनाने में हो रहा है। इसे भी जीआई टैग दिलाया जाएगा। रतलाम की बालम ककड़ी अपने अलग स्वाद के लिए जानी जाती है। इसे भी जीआई टैग दिलाया जाएगा।
जबलपुर के सिंघाड़ा, इंदौर के जीरावन को भी जीआई टैग दिलाया जाएगा। धार के मांडू की खुरासानी इमली, नरसिंहपुर के गुड़, इंदौर के मालवी गराडू को भी जीआई टैग दिलाया जाएगा। देवास के मावा बाटी और सतना के खुरचन को भी जीआई टैग दिलाने की तैयारी की जा रही है।