
भोपाल। मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से सभी जिलों के पेंशन कार्यालय बंद हो जाएंगे, इससे करीब 5 लाख पेंशनर प्रभावित होंगे। राज्य सरकार ने केंद्रीकरण नीति के तहत भोपाल में एकीकृत कार्यालय खोलने का फैसला लिया है। इससे बुजुर्गों को दूर दराज से राजधानी आना पड़ेगा, जिसका हर जिले में व्यापक विरोध हो रहा है।
प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी 55 जिलों में संचालित जिला पेंशन कार्यालय बंद करने की घोषणा की। इनकी जगह भोपाल में एक केंद्रीकृत पेंशन कार्यालय स्थापित किया जाएगा, जहां सभी समस्याओं का निपटारा होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक सुधार और एकरूपता लाने के लिए उठाया गया। लेकिन, पेंशन समस्या निवारण एसोसिएशन ने इसका कड़ा विरोध दर्ज किया है।
ऑनलाइन सुविधाएं जारी रहेंगी
लगभग 5 लाख बुजुर्ग पेंशनरों को अब छोटी-मोटी समस्याओं के लिए भोपाल पहुंचना होगा, जो आर्थिक, शारीरिक और मानसिक बोझ बढ़ाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि जिला स्तर पर कार्यालयों में एकरूपता की कमी को प्रशिक्षण से दूर किया जा सकता था, न कि बंद करके। ऑनलाइन सुविधाएं जारी रहेंगी, लेकिन ग्रामीण और बुजुर्ग पेंशनरों के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित होगी।
फैसला दबाव बनाएगा
प्रदेश भर के लाखों पेंशनर्स को इस फैसले से भारी परेशानी का सामना करना होगा। हालांकि, एसोसिएशन समिति के द्वारा इस कार्रवाई को रोकने की मांग की गई। इसमें हवाला दिया गया कि यदि कोई छोटी समस्या होती है, तो वह उन्हें भोपाल जाना होगा। जो कि आर्थिक, मानसिक और शारीरिक दबाव बनाएगा। ‘पेंशनर समस्या निवारण एसोसिएशन समिति’ के सदस्यों का कहना है कि जिला कार्यालयों में एकरूपता की कमी है तो जिले के अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण देना चाहिए था। जो कि एक बेहतर समाधान होता।
तहसील स्तर पर वैकल्पिक केंद्र खोले
पेंशनर संगठनों ने सरकार को पत्र लिखकर निर्णय वापस लेने की मांग की है। उनका तर्क है कि बुजुर्गों को लंबी यात्रा से बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर ही व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। सरकार से अपील की गई है कि कम से कम तहसील स्तर पर वैकल्पिक केंद्र खोले जाएं। फिलहाल, कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
सरकार ऑनलाइन पोर्टल को मजबूत करने का दावा कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्षरता की कमी वाले पेंशनरों को कठिनाई होगी। इंदौर, भोपाल सहित प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन की तैयारी हो रही है। यह निर्णय मध्य प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
