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इंदौर। देवगुराड़िया क्षेत्र में वन मंडल द्वारा विकसित किया जा रहा ‘नगर वन’ अब केवल हरित स्थल नहीं रहेगा, बल्कि यह इंदौर के इको-टूरिज्म को एक नया आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयाम भी देगा। इस परियोजना पर लगभग ₹1.42 करोड़ की लागत से काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रकृति, ध्यान, योग और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को एक ही स्थान पर जोड़ना है, ताकि लोग शांति, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझ सकें।
‘नगर वन’ योजना भारत सरकार द्वारा संचालित है, जिसका उद्देश्य शहरों में ऐसे हरित क्षेत्र विकसित करना है, जहाँ लोग प्रकृति के करीब आ सकें और पर्यावरण के महत्व को समझ सकें। इस योजना के अंतर्गत वन विभाग शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे वन और प्राकृतिक उद्यान तैयार करता है, जिनमें स्थानीय और औषधीय पौधों का रोपण किया जाता है। इससे न केवल हरियाली बढ़ती है, बल्कि लोगों को शुद्ध हवा, शांत वातावरण और प्राकृतिक अनुभव भी मिलता है। नगर वन योजना पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य और प्रकृति से भावनात्मक जुड़ाव को एक साथ मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है।
आत्मिक शांति और प्रकृति से जुड़ाव
वन मंडल अधिकारी प्रदीप मिश्रा ने बताया कि नगर वन देवगुराड़िया को ऐसा स्थान बनाया जा रहा है, जहाँ लोग शहर की भागदौड़ से दूर आकर मानसिक शांति प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि यह ‘नगर वन’ केवल घूमने की जगह नहीं होगी। बल्कि, यह आत्मिक शांति, प्रकृति से जुड़ाव और पर्यावरण जागरूकता का केंद्र बनेगा।
इस परियोजना में कई प्रकार की संरचनाएँ विकसित की जा रही हैं। इसमें ध्यान और योग के लिए विशेष मंच, प्राकृतिक शैली में बने पथ (वॉकिंग ट्रैक), लकड़ी और बाँस से बने बैठने के स्थान, पारंपरिक भारतीय शैली की झोपड़ियाँ, इसके अलावा छोटा जलस्रोत, प्रवेश द्वार, सूचना केंद्र और छायादार विश्राम स्थल शामिल हैं।
औषधीय, धार्मिक और छायादार पौधे
इन सभी ढाँचों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वे प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहें और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुँचे। ‘नगर वन’ में विभिन्न प्रकार के औषधीय, धार्मिक और छायादार पौधे लगाए जा रहे हैं। जैसे पीपल, बरगद, नीम, अशोक, बेल, तुलसी, आँवला, अर्जुन, हरसिंगार, गुलमोहर आदि। इन पौधों का चयन इस सोच के साथ किया गया है कि यहाँ आने वाले लोग भारतीय संस्कृति और आयुर्वेदिक परंपरा से भी जुड़ सकें।
डीएफओ ने कहा कि ‘नगर वन’ देवगुराड़िया इंदौर के तीन प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में से एक होगा। रालामंडल वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक पर्यटन का केंद्र है, उमरीखेड़ा पर्यावरण शिक्षा और वन्य अनुभव का स्थान है। जबकि, देवगुराड़िया ‘नगर वन’ आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र बनेगा। ये तीनों मिलकर इंदौर को एक संपूर्ण इको-टूरिज्म अनुभव प्रदान करेंगे।


तनाव और अवसाद कम करने का स्थल
नगर वन में नियमित रूप से योग शिविर, ध्यान सत्र, प्रकृति भ्रमण, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम, स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए शैक्षणिक भ्रमण, तथा सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इससे बच्चों और युवाओं को प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव विकसित करने में मदद मिलेगी। इस परियोजना का एक उद्देश्य यह भी है कि शहर के लोग अपने दैनिक जीवन में मानसिक संतुलन बनाए रखें। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव और अवसाद बढ़ रहा है। ऐसे में नगर वन जैसे स्थल लोगों के लिए प्राकृतिक उपचार केंद्र की तरह कार्य करेंगे।
प्रकृति, संस्कृति और अध्यात्म का संगम
डीएफओ इंदौर प्रदीप मिश्रा (आईएफएस) ने कहा कि प्रदीप मिश्रा ने बताया कि हम चाहते हैं कि देवगुराड़िया का नगर वन ऐसा स्थान बने, जहाँ प्रकृति, संस्कृति और अध्यात्म एक साथ दिखाई दें। यह आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। नगर वन’ के शुरू होने से इंदौर को एक नई पहचान मिलेगी। यह न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए भी स्वास्थ्य, शांति और प्रकृति से जुड़ाव का एक स्थायी स्थान सिद्ध होगा।