
इंदौर। नगर वन योजना के तहत इंदौर एक नई पहचान गढ़ रहा है। यहाँ जंगल अब केवल संरक्षित क्षेत्र नहीं रहेंगे, बल्कि शिक्षा, शांति और सामुदायिक जीवन के जीवंत केंद्र बनेंगे। आईआईटी इंदौर और देवगुराड़िया में विकसित हो रहे नगर वन के प्रस्तावित प्रोजेक्ट इस दिशा में एक मजबूत मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं, जो संरक्षण, सीख और मानसिक सुकून साथ लेकर चलते हैं।
नगर वन योजना भारत सरकार द्वारा संचालित है, जिसका उद्देश्य शहरों में ऐसे हरित क्षेत्र विकसित करना है, जहाँ लोग प्रकृति के करीब आ सकें और पर्यावरण के महत्व को समझ सकें। इस योजना के अंतर्गत वन विभाग शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे वन और प्राकृतिक उद्यान तैयार करता है, जिनमें स्थानीय और औषधीय पौधों का रोपण किया जाता है। इससे न केवल हरियाली बढ़ती है, बल्कि लोगों को शुद्ध हवा, शांत वातावरण और प्राकृतिक अनुभव भी मिलता है। नगर वन योजना पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य और प्रकृति से भावनात्मक जुड़ाव को एक साथ मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है।
नगर वन आईआईटी इंदौर
इनमें सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट आईआईटी इंदौर परिसर में विकसित किया जा रहा नगर वन है। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट की लागत ₹1.985 करोड़ है और इसे वित्तीय वर्ष 2025–26 में पूरा किया जाना है। यह क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण, छात्र सहभागिता और जन मनोरंजन को एक साथ जोड़ने वाला एक समन्वित हरित परिसर होगा।
छात्र जंगल और संरक्षण की प्रक्रियाओं से जुड़ सकेंगे
इंदौर के डीएफओ प्रदीप मिश्रा (आईएफएस) ने कहा कि यह नगर वन एक लिविंग क्लासरूम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ छात्र सीधे जंगल और संरक्षण की प्रक्रियाओं से जुड़ सकेंगे। आईआईटी नगर वन में नेचर ट्रेल, बर्ड वॉचिंग ट्रैक, हरित लैंडस्केप, जल संरचनाएं, बैठने के स्थान, वॉच टॉवर, प्रवेश द्वार, रोड, आंतरिक पथ, साइन बोर्ड, सोलर लाइटिंग, फेंसिंग और विज़िटर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह क्षेत्र इस तरह से बनाया जा रहा है कि लोग जंगल के करीब आएं, लेकिन उसकी संवेदनशीलता बनी रहे। यह नगर वन केवल आईआईटी के छात्रों और स्टाफ के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी खुला रहेगा।
प्रजातियों के लिए नर्सरी की स्थापना
इस प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दुर्लभ, संकटग्रस्त और संकटापन्न (आरईटी) प्रजातियों के लिए नर्सरी की स्थापना है। वन स्वीकृति की शर्तों के अंतर्गत आईआईटी को वन विभाग के सहयोग से यह नर्सरी विकसित करनी है। यहाँ छात्र बीज संग्रह, पौध तैयार करने और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया में भाग लेंगे, जिससे वे इंदौर के आरईटी संरक्षण अभियान का हिस्सा बन सकेंगे।
वनवासी समुदायों के पारंपरिक भोजन
इस नगर वन में संयुक्त वन समिति के माध्यम से संचालित एक ईको-रेस्टोरेंट भी प्रस्तावित है। यहाँ वनवासी समुदायों के पारंपरिक भोजन उपलब्ध होंगे, जिससे उनकी आजीविका को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों को वनों के सामाजिक और आर्थिक पक्ष को समझने का अवसर मिलेगा।
देवगुराड़िया का नगर वन
जहां आईआईटी नगर वन विज्ञान और नवाचार का प्रतीक है, वहीं देवगुराड़िया का नगर वन वनों के आध्यात्मिक और भावनात्मक पक्ष को दर्शाता है। ₹1.42 करोड़ की लागत से तथा 50 हेक्टेयर में विकसित यह नगर वन ध्यान, शांति और मानसिक सुकून के लिए बनाया जा रहा है। यहां ध्यान और योग के लिए विशेष मंच, प्राकृतिक शैली में बने पथ (वॉकिंग ट्रैक), लकड़ी और बाँस से बने बैठने के स्थान, छोटा जलस्रोत, प्रवेश द्वार, सूचना केंद्र और छायादार विश्राम स्थल और ध्यान केंद्र क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।
देवगुराड़िया का यह नगर वन भारतीय परंपरा से प्रेरित है, जहाँ जंगलों को ज्ञान, शांति और उपचार का स्थान माना गया है। यहाँ लोग प्रकृति के साथ आत्मिक जुड़ाव महसूस कर सकेंगे। आईआईटी नगर वन जहाँ जंगलों को सीख और अनुसंधान का माध्यम बनाता है, वहीं देवगुराड़िया नगर वन उन्हें शांति और आत्मिक संतुलन का केंद्र बनाता है। दोनों मिलकर यह दिखाते हैं कि संरक्षण केवल एक दिशा में नहीं, बल्कि कई आयामों में समाज की सेवा करता है।
इंदौर की आगामी नगर वन योजनाएं
इन दो नगर वनों के सफल प्रयोग के आधार पर इंदौर वन मंडल ने वर्ष 2026–27 के लिए चार नए नगर वन स्थलों की पहचान की है :
● 35 हेक्टेयर : रमना बिजासन।
● 15 हेक्टेयर : रमना बिजासन।
● 20 हेक्टेयर : TCS कैंपस के पास।
● 15 हेक्टेयर – रालामंडल से लगा क्षेत्र।
इन सभी के लिए थीम आधारित प्रस्ताव बनाकर वन भवन, भोपाल भेजे जाएँगे और वहाँ से भारत सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि ये नगर वन शहर के ‘ग्रीन लंग्स’ बनेंगे और नागरिकों को शांति का अनुभव देंगे। आने वाले समय में ये नगर वन ऐसे प्राकृतिक मनोरंजन केंद्र बनेंगे, जहाँ लोग शहर की भागदौड़ से दूर सुकून पाएँगे। आईआईटी नगर वन, देवगुराड़िया नगर वन और प्रस्तावित नए प्रोजेक्ट मिलकर यह दिखाते हैं कि इंदौर में संरक्षण अब शिक्षा, आध्यात्म और शहरी जीवन का एक साझा आंदोलन बन रहा है।
