
लोणार (जिला बुलढाणा)। विश्व प्रसिद्ध खारे पानी की लोणार झील पर अब विनाश का खतरा मंडरा रहा है। 52 हजार वर्ष पहले उल्कापिंड के टकराने से बनी यह अनोखी झील आज प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। झील का खारापन तेजी से घटने लगा है,जिससे इसका प्राकृतिक स्वरूप और जैव विविधता खतरे में है।
कांग्रेस के जिला महासचिव राजेश मापारी ने इस गंभीर पर्यावरणीय संकट पर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि राजस्व, वन, पुरातत्व और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की उदासीनता ने झील के पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ दिया। पहले झील के पानी का पीएच लेवल 11.5 था। लेकिन, अब अनियंत्रित जल प्रवाह और विकास कार्यों के कारण यह स्तर तेजी से गिरा है।
मापारी ने बताया कि मानसून में गांव का लगभग 25 प्रतिशत वर्षा जल और सीवेज सीधे झील में मिल जाता है, जिससे इसका खारापन घटकर मीठे पानी में बदलने की स्थिति बन रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभागों को कई बार चेतावनी दी गई, पर कार्रवाई नहीं हुई। मापारी, प्रा गजानन खरात, शेख समद और विकास मोरे ने कहा कि यदि सरकार ने अब भी कदम नहीं उठाए, तो जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। ज्ञापन की प्रतियां मुख्य सचिव, कलेक्टर बुलढाणा और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को भी भेजी गई।
