
नई दिल्ली। आईपीएस अफसर अभिषेक तिवारी ने भारतीय पुलिस सेवा की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। गृह विभाग को सौंपे इस्तीफे में उन्होंने इस्तीफा देने का कारण व्यक्तिगत बताया। आईपीएस अभिषेक आईटी क्षेत्र में अपना भविष्य देख रहे है। उन्होंने इस सेक्टर में अपने आगामी प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए आईपीएस की नौकरी छोड़ दी। प्रदेश के तीन जिलों में वे बतौर एसपी सेवा दे चुके हैं।
एमपी कैडर के 2013 बैच के अभिषेक तिवारी इस समय नेशनल टेक्निकल रिसर्च आर्गेनाइजेशन (एनटीआरओ) में पदस्थ हैं। तिवारी ने कहा कि वे साइबर तकनीकी के मामले में कुछ नया करने की योजना बना रहे हैं। वे दो साल मैनेजमेंट कंपनी में भी काम कर चुके हैं। उन्हें राष्ट्रपति के वीरता के पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
आईआईएम इंदौर से फाइनेंस में पीजीडीएम किया
2012 में यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद 2013 में वे आईपीएस के लिए चयनित हुए थे। सिवनी में 6 अप्रैल 1984 को जन्मे अभिषेक ने आईआईएम इंदौर से फाइनेंस में पीजीडीएम किया। उन्होंने आईपीएस बनने से पहले जबलपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री ली।
बतौर एसपी पहली पोस्टिंग बालाघाट में
उन्होंने मुंबई में मैनेजमेंट कंपनी में दो साल तक डिप्टी मैनेजर के रूप में काम किया गया इसके बाद वे आईपीएस बने। एसपी के रूप में अभिषेक तिवारी की पहली पोस्टिंग बालाघाट में हुई थी। बालाघाट में ही उनके अभियान के चलते उन्हें राष्ट्रपति का वीरता पदक मिला।
सागर से उन्हें हटाया गया था
सागर एसपी के रूप में पदस्थ रहे अभिषेक तिवारी को हटाया गया था। यहां बारिश के मौसम में दीवार गिरने से 9 बच्चों की मौत हो गई थी। हादसा रहली विधानसभा क्षेत्र के शाहपुर में हुआ था। तब एसपी तिवारी को हटाने की कार्यवाही पर सवाल उठे थे। क्योंकि, तिवारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ होने के चलते खुद को रिलीव करने के लिए सरकार से आग्रह कर रहे थे। लेकिन, सरकार उन्हें रिलीव नहीं कर रही थी। सागर में घटना हुई तो तिवारी को हटाया गया था।