
इंदौर। मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है। रविवार को दिन का तापमान नीचे आया, जबकि रात का पारा चढ़ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर दिशा से आ रही हवाओं ने इस बदलाव को जन्म दिया है। हालांकि, मामूली गिरावट के बावजूद दोपहर की तपिश में कोई खास राहत नहीं मिली। जल्द ही गर्मी फिर जोर पकड़ेगी।
विमानतल मौसम केंद्र के आंकड़ों से पता चलता है कि रविवार का अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औसत से तीन डिग्री ऊपर था, लेकिन शनिवार से 0.6 डिग्री कम। रात का न्यूनतम तापमान 15.5 डिग्री पर पहुंचा, जो सामान्य है, मगर शनिवार से 1.3 डिग्री अधिक। पिछले दिनों पश्चिमी हवाओं ने गर्मी बढ़ाई थी, लेकिन अब उत्तर की ठंडी हवाओं ने असर दिखाया। जल्द ही तापमान ऊपर चढ़ना शुरू हो जाएगा।
सोमवार के बाद 8-10 दिन गर्मी से राहत
विशेषज्ञों के अनुमान से कुछ दिन बाद तापमान तेजी से बढ़ेगा और कुछ दिनों में 38-39 डिग्री तक पहुंच सकता है। सोमवार के बाद फिर गिरावट आएगी, जो 8 से 10 दिनों तक चलेगी। मार्च अंत में गर्मी अपने चरम पर होगी। मौसम विभग के लंबी अवधि पूर्वानुमान में कहा गया है कि अप्रैल की शुरुआत में हीटिंग गर्मी पड़ेगी, जबकि मध्य मार्च में पश्चिमी विक्षोभ से हल्की राहत मिल सकती है। लोगों को सलाह है कि दोपहर में बाहर कम निकलें और पानी का सेवन बढ़ाएं।
हवा, नमी और आसपास का हाल
मौसम केंद्र के अनुसार, रविवार को हवा की औसत गति 12-15 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जिसमें उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा हावी थी। नमी का स्तर दिन में 25-30% और रात में 50-55% के बीच रहा, जिससे सुबह की ठंडक महसूस हुई। इंदौर के अलावा देवास, धार और उज्जैन जैसे पड़ोसी जिलों में भी यही ट्रेंड दिखा, जहां अधिकतम तापमान 34-36 डिग्री के दायरे में रहा। कोई वर्षा या कोहरा नहीं हुआ, लेकिन धुंधभरी सुबह हुई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मध्यम स्तर पर रहा, जो धूल भरी हवाओं से प्रभावित था।
जल्द ही गर्मी फिर जोर पकड़ेगी
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर दिशा से आ रही हवाओं ने इस बदलाव को जन्म दिया है। हालांकि, मामूली गिरावट के बावजूद दोपहर की तपिश में कोई खास राहत नहीं मिली। जल्द ही गर्मी फिर जोर पकड़ेगी। पिछले दिनों पश्चिमी हवाओं ने गर्मी बढ़ाई थी, लेकिन अब उत्तर की ठंडी हवाओं ने असर दिखाया। सोमवार के बाद तापमान में फिर बदलाव दर्ज होगा।
स्वास्थ्य से कृषि तक चुनौतियां
इस मौसम की वजह से शहरवासी दोहरी मार झेल रहे हैं। तेज धूप और उतार-चढ़ाव से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और पानी-जनित बीमारियां बढ़ रही हैं। खासकर मजदूर वर्ग और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है। उद्योग क्षेत्रों में बिजली व पानी की मांग 5-50% तक उछली है, जिससे टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई। किसानों को गेहूं व सब्जियों की फसल में नुकसान हो रहा है। क्योंकि, शुष्क हवाएं नमी चुरा लेती हैं। जल स्तर गिरने से निगम को टैंकरों पर जोर देना पड़ रहा, जबकि दुकानदारों व बाजारों में बिक्री प्रभावित हो रही है।
